Ram Navami 2019 : जानें किन गुणों के कारण भगवान राम कहलाए 'मर्यादा पुरुषोत्तम'
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इन गुणों ने बनाया मर्यादा पुरुषोत्तम
भगवान ने अपने आदर्श चरित्र से मानवता को अमर बना दिया। उससे पूर्व सुर और असुर का ही नाम अधिक लिया जाता था। मानव का महत्व अब तक अज्ञात था। श्री राम जी ने अपने अलौकिक स्वभाव, अद्भुत कार्य, उत्तम शील, अद्वितीय वीरता, अनुकरणीय सहनशीलता, विनम्रता, धर्म-प्रियता, परोपकार, स्वार्थ-त्याग आदि से जन-जन के मानस में अपना अधिकार जमा लिया था। यही कारण है कि अपने जीवनकाल में ही वे परम पूज्य हो गये थे और उसके बाद उत्तरोत्तर उनके प्रति श्रद्धा भक्ति भावना में विकास होता गया।
उनके चरित्र का गुणगान केवल भारत अथवा निकटस्थ देशों में ही सीमित नहीं है। विश्व के अनेक सुदूर देशों में भी उनकी जीवन कथाएं दोहराई जाती हैं। सुमात्रा, जावा, कोरिया, मलेशिया आदि अनेक देशों में अति प्राचीन काल से राम कथा प्रचलित है। कई देशों में अहिंदू लोग भी रामलीला करते हैं।
धर्म की रक्षा और दुष्टों के का दमन आवश्यक है, इसलिए आततायियों का विनाश किया किंतु उनसे कोई निजी लाभ नहीं उठाया। उनका राज्य उनके भाईयों को सौंप दिया। केवल वहां की प्रजा की पीड़ा का अंत किया।
असत्य और अन्याय पर सत्य और न्याय की विजय के सिद्धांत की स्थापना की। इसमें उन्हें पशु-पक्षियों तक से भी सहयोग मिला। संस्कृत के सुप्रसिद्ध कवि मुरारी ने कहा है कि रामायण और राम चरित्र का तथ्य ही यह है कि न्यायी की सहायता पशु-पक्षी भी करते हैं और कुमार्ग में चलने वाले अन्यायी का साथ उनके सगे भाई भी छोड़ जाते हैं।