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जैन समुदाय के लिए बेहद खास होता है रोहिणी व्रत, जानिए पूजा विधि
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:24 PM IST
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जैन समुदाय के लिए रोहिणी व्रत का विशेष महत्व होता है। इस बार रोहिणी व्रत 31 अक्टूबर को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जैन समुदाय में कुल 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र रोहिणी नक्षत्र होता है। इस व्रत की खास बात यह है कि साल में यह व्रत एक बार नहीं बल्कि हर महीने में आता है। सामान्य रूप से महीने का 27वां दिन रोहिणी नक्षत्र में पड़ता है।
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ऐसी मान्यता है कि यह व्रत महिलाओं द्वारा अपने पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता है। यह व्रत रखने से मां रोहिणी जातक के घर से कंगाली को दूर भगाकर सुख एवं समृद्धि की वर्षा करती है। व्रत की पूजा के दौरान जातक मां से यह प्रार्थना करता है उसके द्वारा की गई सभी गलतियों को वे माफ करें और उसके जीवन में बने सभी कष्टों का हरण करें। इस व्रत के दौरान पूरे दिन भूखा रहना होता है।
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जैन समुदाय में इस व्रत का बेहद महत्व है। 27 नक्षत्रों में से रोहिणी भी एक है। जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है, उस दिन रोहिणी व्रत किया जाता है। यह दिन प्रति 27 दिनों के बाद आता है, इस प्रकार रोहिणी व्रत वर्ष में बारह से तेरह बार किया जाता है।