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Kalashtami 2019 : 26 अप्रैल को मनाई जाएगी कालाष्टमी, जानें किस पूजा से प्रसन्न होंगे भैरव

Mon, 22 Apr 2019 11:31 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Mon, 22 Apr 2019 11:31 AM IST
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kaal bhairav puja vidhi on kalashtami 2019
Kalashtami 2019

प्रत्येक माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी की तिथि पर भगवान भैरव की विशेष रूप से साधना आराधना की जाती है। तंत्र-मंत्र के साधकों के अनुसार भगवान भैरव को परम शक्तिशाली रुद्र बताया गया है। इन्हें देवाधिदेव भगवान शिव का अवतार माना गया है। इस माह काशी के कोतवाल कहे जाने वाले भगवान भैरव की पूजा की पावन तिथि यानी कालाष्टमी 26 अप्रैल को मनाई जाएगी। भगवान भैरव एक ऐसे देवता हैं जिनकी साधना करने वाले भक्त पर किसी भी प्रकार की उपरी बाधा, भूत-प्रेत, जादू-टोने आदि का खतरा नहीं रहता है। 



कालभैरव अष्टमी के मौके पर आइए जानते हैं कैसे हुआ काल भैरव का प्राकट्य और क्या पूरी कथा...

kaal bhairav puja vidhi on kalashtami 2019
Kalashtami 2019 - फोटो : अमर उजाला

ऐसे हुआ काल भैरव का प्राकट्य 

कालभैरव के जन्म को लेकर पुराणों में एक बड़ी ही रोचक कथा है। शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में कौन सर्वश्रेष्ठ है इस बात को लेकर वाद-विवाद पैदा हो गया। तब दोनों ने अपने आपको श्रेष्ठ बताया और आपस में  एक दूसरे से युद्ध करने लगे। इसके बाद सभी देवताओं ने वेद से पूछा तो उत्तर आया कि जिनके भीतर चराचर जगत, भूत, भविष्य और वर्तमान समाया हुआ है भगवान शिव ही सर्वश्रेष्ठ हैं।

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kaal bhairav puja vidhi on kalashtami 2019
Kalashtami 2019

जब ब्रह्माजी ने शिवजी को कहे अपशब्द

वेद के द्वारा भगवान शिव की महिमा ब्रह्माजी को पसंद नहीं आई और उन्होंने अपने पांचवें मुख से शिव के बारे में भला-बुरा कहा। इससे वेद अत्यंत दु:खी हुए। उसी समय एक दिव्यज्योति के रूप में भगवान रूद्र प्रकट हुए। तब ब्रह्मा ने कहा कि हे रूद्र तुम मेरे ही सिर से पैदा हुए हो। अधिक रुदन करने के कारण मैंने ही तुम्हारा नाम रूद्र रखा है इसलिए तुम मेरी सेवा में आ जाओ।

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kaal bhairav puja vidhi on kalashtami 2019
Kalashtami 2019

ऐसे कटा ब्रह्माजी का पांचवा सिर 

ब्रह्माजी के इस आचरण पर भगवान शिव को अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने उसी क्षण भैरव को प्रकट करते हुए कहा कि तुम ब्रह्मा पर शासन करो। दिव्य शक्ति संपन्न भैरव ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाखून से शिव के प्रति अपमान जनक शब्द कहने वाले ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को ही काट दिया।

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kaal bhairav puja vidhi on kalashtami 2019
Kalashtami 2019

इस तरह भैरव हुए ब्रह्म हत्या से मुक्त 

इस पूरे प्रकरण के बाद भगवान शिव के कहने पर भैरव जी काशी को कर गए, जहां उन्हें ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिली। रूद्र ने इन्हें काशी का कोतवाल नियुक्ति किया। आज भी वाराणसी में भगवान भैरव काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। जिनका दर्शन किये बगैर बाबा विश्वनाथ का दर्शन अधूरा रहता है।

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