फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Holi Puja Vidhi Before Holika Dahan Know About Rituals Significance and Religious Beliefs in Hindi

Holi 2025: होलिका दहन से पहले कैसे करें होली की पूजा, जानिए धार्मिक महत्व और पूजाविधि

Mon, 10 Mar 2025 10:48 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 10 Mar 2025 10:48 AM IST
सार

Holi  2025: लोक मान्यता के अनुसार ठंडी होली की पूजा करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोग-व्याधियों से बचाती हैं। विशेषकर गर्मी के मौसम में फैलने वाले संक्रामक रोगों से बचने के लिए यह पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

विज्ञापन
Holi Puja Vidhi Before Holika Dahan Know About Rituals Significance and Religious Beliefs in Hindi
होलिका दहन 2025: होलिका दहन के दिन महिलाएं "ठंडी होली" की पूजा करती हैं - फोटो : amar ujala

विस्तार

Holi  2025: होलिका दहन से पूर्व महिलाओं द्वारा की जाने वाली ठंडी होली की पूजा एक प्राचीन धार्मिक और लोक परंपरा है, जिसका संबंध न केवल भक्त प्रहलाद की कथा से है, बल्कि परिवार की सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों से रक्षा से भी जुड़ा हुआ है। यह पूजा मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं करती हैं, ताकि उनके परिवार पर कोई संकट न आए और संतान दीर्घायु और सुखी रहे।

विज्ञापन


धार्मिक मान्यता और महत्व
हिंदू धर्म में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान भी है। होली से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। इसी वरदान के घमंड में उसने भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और स्वयं होलिका जलकर भस्म हो गई। इस घटना को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में देखा जाता है। इसी कारण होलिका दहन के दिन महिलाएं "ठंडी होली" की पूजा करती हैं, ताकि उनके परिवार को किसी भी प्रकार की बुरी शक्ति या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव न लगे। 
विज्ञापन


इस पूजा का महत्व इसलिए भी अधिक माना जाता है क्योंकि यह सुख-समृद्धि, संतान की सुरक्षा और पारिवारिक कल्याण का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं यह पूजा सच्चे मन से करती हैं, उन्हें देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अतिरिक्त इस पूजा का संबंध शीतला माता से भी माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार ठंडी होली की पूजा करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोग-व्याधियों से बचाती हैं। विशेषकर गर्मी के मौसम में फैलने वाले संक्रामक रोगों से बचने के लिए यह पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


Holika Dahan Remedies: होलिका दहन की अग्नि में डालें ये 10 चीजें, मिलेगी सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति

पूजा विधि
इस पूजा को करने के लिए महिलाएं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा सामग्री के साथ होली स्थल पर जाती हैं। वहां पहले जल से अर्पण कर होलिका को ठंडा किया जाता है। इसके बाद रोली, चावल, हल्दी, पुष्प और गाय के गोबर से बनी गुलरी की माला अर्पित किए जाते हैं। फिर होलिका के चारों ओर कच्चा सूत लपेटा जाता है और नारियल अर्पित किया जाता है। इसके बाद महिलाएं गुड़, चना और गेहूं की बालियां अर्पित करती हैं। इन बालियों को होलिका दहन के बाद घर लाकर रखा जाता है, क्योंकि इसे शुभ और सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है। इसके पश्चात महिलाएं परिक्रमा करती हैं और दीप जलाकर अपने परिवार की सुरक्षा और खुशहाली की कामना करती हैं। अंत में मिठाई और प्रसाद बांटकर पूजा संपन्न की जाती है।

Holi 2025: जानें होली पर गुलरी माला चढ़ाने की परंपरा और इसका ज्योतिषीय महत्व

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed