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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Hanuman Janmotsav 2025 Chant Hanuman Chalisa Know Its Benefits And Importance in Hindi

Hanuman Janmotsav 2025: इस चालीसा के बिना अधूरी है हनुमान जन्मोत्सव की पूजा, जानें इसके लाभ और महत्व

Fri, 11 Apr 2025 05:28 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 11 Apr 2025 05:28 PM IST
सार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलियुग में एक मात्र हनुमान जी ही जीवित देवता हैं और वह सदैव अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इसलिए हनुमान जी की पूजा में श्री हनुमान चालीसा पाठ अवश्य करें। 

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Hanuman Janmotsav 2025 Chant Hanuman Chalisa Know Its Benefits And Importance in Hindi
Hanuman Janmotsav 2025 - फोटो : freepik

विस्तार

Hanuman Janmotsav 2025: हिंदू धर्म में रोजाना हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाती हैं। परंतु प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए भक्तजन मंगलवार को उनकी खास उपासना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हालांकि संकटमोचन को प्रसन्न करने के लिए चैत्र माह के शुक्ल की पूर्णिमा तिथि को सबसे शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है। बता दें, यह तिथि हनुमान जी के जन्म के रूप में जानी जाती है। इस दिन देशभर में हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है।

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इस बार 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जन्मोत्सव का महापर्व है। इस तिथि पर जगह-जगह भजन-कीर्तन, जागरण, पाठ, भंडारे व पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है। इस दौरान पूजा के समय हनुमान चालीसा का पाठ करना और भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि यदि सच्चे भाव से हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए, तो साधक को सभी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्राप्त होती हैं। ऐसे में आइए इस चालीसा के बारे में जानते हैं....

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हनुमान चालीसा के लाभ और महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलियुग में एक मात्र हनुमान जी ही जीवित देवता हैं और वह सदैव अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इसलिए हनुमान जी की पूजा में श्री हनुमान चालीसा पाठ अवश्य करें। कहा जाता है कि इस चालीसा के प्रभाव से व्यक्ति के मन से सभी डर भय, चिंता और तनाव दूर होते हैं। इसके अलावा साधक के बल में वृद्धि और मानसिक शांति मिलती हैं। वहीं ज्योतिषियों के मुताबिक इसका पाठ करने से मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से राहत प्राप्त होती है।

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन वरन विराज सुवेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस वर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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