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Chaitra Navratri 2024:शक्ति की आराधना का पर्व प्रारंभ, जानें मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजन विधि
Tue, 09 Apr 2024 05:57 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 09 Apr 2024 05:57 AM IST
सार
नवरात्रि के 09 दिनों में 09 देवियों की विशेष पूजा का विधान है। कलश स्थापना के साथ ही देवी दुर्गा के पहले अवतार माता शैलपुत्री को नवरात्रि के पहले दिन,जो नवरात्रि का प्रारंभिक दिन होता है,पूजा जाता है। जिसमें पहले दिन कलश पूजा के साथ मां शैलपुत्री की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
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चैत्र नवरात्रि पर मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Chaitra Navratri 2024 1st Day: आज से आदिशक्ति की पूजा का पावन पर्व नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं। सनातन परंपरा में नवरात्रि के 09 दिनों में 09 देवियों की विशेष पूजा का विधान है। कलश स्थापना के साथ ही देवी दुर्गा की पहले अवतार माता शैलपुत्री को नवरात्रि के पहले दिन,जो नवरात्रि का प्रारंभिक दिन होता है,पूजा जाता है। जिसमें पहले दिन कलश पूजा के साथ मां शैलपुत्री की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। यह पूजा भक्तों को शक्ति और सामर्थ्य के साथ सजीव होने की कल्पना कराती है।
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शैलपुत्री की पूजा का महत्व
माता शैलपुत्री की पूजा से भक्तों को सांसारिक सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा करने से मनुष्य के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और वह उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है।
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पूजाविधि
नवरात्रि के पहले दिन स्नान-ध्यान करने के बाद शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर लाल रंग के वस्त्र को बिछाकर उस पर कुछ अक्षत रखकर मां शैलपुत्री का चित्र रखें और उसके बाद गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा लाल फल, लाल फूल, लाल वस्त्र, लाल चंदन आदि अर्पित करके करें। मां शैलपुत्री की पूजा में गाय का घी और उससे बना भोग विशेष रूप से लगाएं। अब माता की आरती कर उन्हें प्रसन्न करें। इस दिन मां को गाय का शुद्ध देसी घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता हैतथा सभी व्याधियां दूर होकर शरीर निरोगी रहता है।
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मां शैलपुत्री की कथा
नवरात्रि के पहले दिन पूजी जाने वाली देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को हिमालय की पुत्री माना जाता है। मान्यता है इससे पूर्व उनका जन्म राजा दक्ष की पुत्री सती के रूप में हुआ था। जिनका विवाह भगवान शिव से हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन किया और उसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। जब देवी सती को इसके बारे में पता चला तो वह अपने पिता के घर बगैर निमंत्रण के ही पहुंच गईं। जहां पर महादेव के प्रति अपमान महसूस होने पर उन्होंने स्वयं को महायज्ञ में जलाकर भस्म कर लिया। जब यह बात भगवान शिव को पता चली तो उन्होंने यज्ञ को ध्वंश करके सती को कंधे पर लेकर तीनों में विचरण करने लगे। इसके बाद भगवान विष्णु ने भगवान शिव के मोह को दूर करने के लिए सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काटकर 51 भागों में विभक्त कर दिया। मान्यता है कि माता सती के टुकड़े जहां-जहां पर गिरे वे सभी शक्तिपीठ कहलाए। इसके बाद देवी सती ने शैलराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में दोबारा जन्म लिया, जिन्हें माता शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है।
देवी शैलपुत्री की पूजा का मंत्र
मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करने से उनकी कृपा और आशीर्वाद मिलता है।
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:’