स्कंद पुराण में वैशाख मास को ब्रह्मा जी ने सभी मासों में सर्वश्रेष्ठ बताया है। यह पावन मास माता की भांति सब जीवों को सदा अभीष्ट वस्तु प्रदान करने वाला है। इसी मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है अक्षय तृतीया। यह माता पार्वती की बनाई तिथि है। इसी दिन घोर तपस्या करके माता पार्वती ने महादेव को पति रूप में प्राप्त किया था और भगवान शिव ने प्रसन्न होकर माता पार्वती को यह आशीर्वाद दिया था कि इस दिन किसी भी प्राणी द्वारा मन-वचन और कर्म से किया गया पूजन और व्रत निष्फल नहीं जाएगा।
Akshaya Tritiya 2019 : सिर्फ सोना ही नहीं, इन सरल उपायों से भी मिलता है सुख-समृद्धि और सौभाग्य
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अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
अक्षय तृतीया की पावन तिथि अबूझ मुहूर्त के रूप में जानी जाती है। इसी दिन भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है। यह सतयुग के आरंभ तिथि है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने मैथुनी सृष्टि का सृजन इसी दिन किया था। जिसके फलस्वरूप अक्षय तिथि होने के कारण प्राणियों की वृद्धि दर वृद्धि होती रही है।
अक्षय तृतीया का महाउपाय
अक्षय तृतीया का सोना की खरीददारी से कोई संबंध नहीं है। मौजूदा समय में तमाम लोगों ने अक्षय तृतीया जैसे पावन पर्व को सोने के क्रय का पर्व बना दिया है, जो कि बिल्कुल सही नहीं है। यह अक्षय पुण्य प्रदान करने का महापर्व है। सुख-सौभाग्य और समृद्धि के लिए इस दिन बजाय सोना खरीदने के इन वस्तुओं का दान ज्यादा शुभ फल प्रदान करने वाला होता है। अक्षय तृतीया पर किसी को दिया गया पुस्तक दान, औषधि दान, अन्न दान, वस्त्र दान, कन्यादान अत्यंत शुभ फल प्रदान करने के साथ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है। अक्षय तृतीया के दिन मिलने वाला फल अक्षुण्य रहता है।
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इन कार्यों के लिए है अत्यंत शुभ
सुख-समृद्धि और सौभाग्यदायिनी अक्षय तृतीया सिर्फ भगवान शिव एवं पार्वती की पूजा कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए ही नहीं है, बल्कि यह वाहन खरीदने, वर-कन्या के मेल-मिलाप, वरीक्षा या सगाई, विवाह, द्विरागमन, मकान खरीदने, नये व्यापार के शुभारंभ, गुरु मंत्र प्राप्त करने, नए अनुबंध, नई दुकान खोलने, गृह प्रवेश समेत किसी भी नवीन कार्य के लिए भी शुभ है। सनातन धर्म के अनुसार 16 संस्कारों में से अधिकाधिक संस्कार इस दिन किए जा सकते हैं।
इस पूजन विधि से पाएं अक्षय पुण्य
अक्षय तृतीया के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् भगवान शिव एवं पार्वती की मूर्ति की षोडषोपचार विधि से पूजा करके कोई भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। पूजा के पहले स्नान-ध्यान के पश्चात् शुद्ध आसन पर बैठें। इसके बाद भगवान शिव-पार्वती का भक्ति-भाव से 'ॐ पार्वती पतये नम:' अथवा 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र पढ़ते हुए पंचामृत से स्नान करवाएं। तत्पश्चात् वस्त्र चंदन यज्ञोपवीत गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल एवं ऋतुफल चढ़ाकर 'ॐ पां पार्वती देव्यै नम:' मंत्र से 11 बार स्तवन करें। यदि इसके अलावा आपको देवी का कोई मंत्र आता है, तो आप उसका भी साथ में पाठ कर सकते हैं।