वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त या 'अक्षय तृतीया' के रूप में मनाया जाता है। श्री श्वेतवाराहकल्प में वैवस्वत मन्वन्तर के मध्य सत्ययुग के आरंभ की इस पुण्यदाई तृतीया तिथि को माता पार्वती ने मानव कल्याण हेतु अमोघ फल देनेवाली बनाया है। माँ के आशीर्वाद प्रभावस्वरूप इस तिथि के मध्य किया गया कोई भी कार्य कभी भी निष्फल नहीं होता है।
Akshaya Tritiya 2019 : जानें अक्षय तृतीया के दिन की कौन सी गलतियां बनती हैं अक्षय पाप का कारण
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इन कार्यों के लिए शुभ है अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया की पावन तिथि को व्यापार आरम्भ, गृहप्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, जप-तप, पूजा-पाठ आदि के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन दिया गया दान और मिलने वाला पुण्य अक्षय रहता है, अर्थात् वह कभी नष्ट नहीं होता है।
भूलकर भी न करें ये काम
जिस तरह अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले पुण्य कार्य का क्षय नहीं होता है, उसका फल निश्चित रूप से व्यक्ति को मिलता है, उसी प्रकार इस दिन किये जाने वाले अनाचार, अत्याचार, दुराचार, धूर्तता आदि के परिणाम से होने वाला पाप कर्मफल भी अक्षुण रहता है। अक्षय तृतीया के दिन किया गया पाप हर जन्म में जीव का पीछा करता रहता है। ऐसे में शास्त्रों में इस दिन जीवात्माओं को अत्यंत ही सावधानी बरतने वाला बताया गया है।
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व्रत में न करें नमक का सेवन
इस पावन तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती कहती हैं कि यदि कोई भी स्त्री यदि सभी प्रकार के सुखों को पाना चाहती है तो उसे यह व्रत करते हुए किसी भी प्रकार का सेंधा आदि व्रती नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। महाराज दक्ष की पुत्री रोहिणी ने यही व्रत करके अपने पति चन्द्र की सबसे प्रिय रहीं। उन्होंने बिना नमक खाए यह व्रत किया था।
माता पार्वती ने बताया है व्रत का महात्मय
स्वयं माता पार्वती ने धर्मराज को समझाते हुए कहा है कि यही व्रत करके मै भगवान शिव के साथ आनंदित रहती हूं। ऐसे में कन्याओं को भी उत्तम पति की प्राप्ति के लिए यह व्रत पूरी श्रद्धा-भाव के साथ करना चाहिए। जिस महिला को अभी तक संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो पाई है, उसे भी इस व्रत को करके माता के आशीर्वाद से इस सुख की प्राप्ति हो सकती है। देवी इंद्राणी ने इसी अक्षय तृतीया का व्रत करके जयंत नामक पुत्र प्राप्त किया था। इसी व्रत को करके देवी अरुंधती अपने पति महर्षि वशिष्ट के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त कर सकी थीं।