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Akshaya Tritiya 2020: क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया, जानिए इसका महत्व
Sun, 26 Apr 2020 02:44 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 26 Apr 2020 02:44 AM IST
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Akshaya Tritiya 2020
Akshaya Tritiya 2020 : आज अक्षय तृतीया का त्योहार है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर यह उत्सव हर वर्ष मनाया जाता है। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त में मनाया जाने वाला त्योहार है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचांग देखने की आवश्कयता नहीं पड़ती। अक्षय तृतीया को त्योहार बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए कोई भी शुभ कार्य करने पर इसका फल कई गुना प्राप्त होता है। आइए जानते हैं अक्षय तृतीया का इतना महत्व क्यों है।
अक्षय तृतीया को लेकर कई मान्यताएं हैं-
1- वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के छठें अवतार परशुराम भगवान का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान परशुराम संग विष्णु जी की उपासना की जाती है। इस कारण से अक्षय तृतीया का महत्व है।
2- राजा भागीरथ के हजारों वर्षों की कठोर तपस्या के कारण अक्षय तृतीया के ही दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आईं थी। इस लिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।
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3- अक्षय तृतीया के दिन ही मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है। विधिवत इस दिन पूजा और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
4- अक्षय तृतीया शुभ तिथि पर ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत जैसा महाकाव्य लिखना आरंभ किया था। इसलिए इसदिन का विशेष महत्व है।
5- बंगाल प्रांत में इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करके व्यापारीवर्ग नए तरीके से लेखा-जोखा की किताब का आरंभ करते हैं।
6- अक्षय तृतीया के अवसर पर वृंदावन के श्री बांकेबिहारी जी के मंदिर में इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं। ऐसा साल में एक बार ही होता है।
7- ऐसी मान्यता है कि इसी दिन नर-नारायण ने भी अवतार लिया था।
8- स्वयंसिद्ध मुहूर्त होने के कारण सबसे अधिक विवाह इसी दिन होते हैं।
अक्षय तृतीया का महत्व Akshaya Tritiya Importance
वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त या 'अक्षय तृतीया' के रूप में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य शुरू करने का विशेष महत्व होता है। सबसे ज्यादा शादियां इस तिथि पर करने की परंपरा है।
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अक्षय तृतीया को लेकर कई मान्यताएं हैं-
1- वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के छठें अवतार परशुराम भगवान का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान परशुराम संग विष्णु जी की उपासना की जाती है। इस कारण से अक्षय तृतीया का महत्व है।
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2- राजा भागीरथ के हजारों वर्षों की कठोर तपस्या के कारण अक्षय तृतीया के ही दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आईं थी। इस लिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।
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3- अक्षय तृतीया के दिन ही मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है। विधिवत इस दिन पूजा और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
4- अक्षय तृतीया शुभ तिथि पर ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत जैसा महाकाव्य लिखना आरंभ किया था। इसलिए इसदिन का विशेष महत्व है।
5- बंगाल प्रांत में इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करके व्यापारीवर्ग नए तरीके से लेखा-जोखा की किताब का आरंभ करते हैं।
6- अक्षय तृतीया के अवसर पर वृंदावन के श्री बांकेबिहारी जी के मंदिर में इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं। ऐसा साल में एक बार ही होता है।
7- ऐसी मान्यता है कि इसी दिन नर-नारायण ने भी अवतार लिया था।
8- स्वयंसिद्ध मुहूर्त होने के कारण सबसे अधिक विवाह इसी दिन होते हैं।
अक्षय तृतीया का महत्व Akshaya Tritiya Importance
वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त या 'अक्षय तृतीया' के रूप में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य शुरू करने का विशेष महत्व होता है। सबसे ज्यादा शादियां इस तिथि पर करने की परंपरा है।