फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Smart Beti ›   Where the burden was considered, now she become pride of the village is Kanakalata

जहां बोझ मानते थे, उसी गांव का गौरव है कनकलता

Wed, 24 Oct 2018 08:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 24 Oct 2018 08:15 PM IST
विज्ञापन
Where the burden was considered, now she become pride of the village is Kanakalata
kanaklata
जहां लड़कियों को बोझ समझ कच्ची उम्र में ब्याह दिया जाता रहा है, उसी इतवारिया गांव की कनकलता आज अपने गांव का गौरव बनी हुई है। कानून की पढ़ाई करते हुए गांव की महिलाओं और किशोरियों को शिक्षित कर रही है, एक एन.जी.ओ. में काम भी कर रही है। अगर उसने जिद न ठानी होती, अगर उसके जीजा ने आकर उसके माता-पिता को ठीक से समझाया न होता, तो कनकलता भी गांव की और बहुत सी लड़कियों की तरह बाल विवाह के शिकंजे में फंसकर अपना जीवन तकलीफों से भर चुकी होती।
विज्ञापन


बाल विवाह का दंश झेल रही अपनी बड़ी बहन की तकलीफों से कनकलता ने बहुत कुछ सीखा था। इसलिए जब दसवीं में पढ़ रही 15 साल की कनकलता की शादी की बात घर में चली तो उसने माता-पिता को मनाने में नाकामयाब रहने पर भी हार न मानी और आनन-फानन में अपने जीजा को बुलवाया। उन्हें राजी कर फिर उनके जरिये अपने माता-पिता को मनवाया और अपनी पढ़ाई जारी रखी।
विज्ञापन




आज कनकलता के ही माता-पिता को उसपर गर्व होता है। गांव की और लड़कियां तो उसे रोल-मॉडल मानती ही मानती हैं।अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने स्मार्टफोन फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed