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परिणाम घोषित होने से पहले फिर लटकी जेओए-556 आईटी की भर्ती
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 26 Dec 2018 10:34 AM IST
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फाइनल रिजल्ट के नजदीक पहुंच चुकी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट भर्ती परीक्षा फिर से लटक गई है। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का हवाला देकर एक अभ्यर्थी ने कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस भेजा है। इन पदों के लिए आवेदन के समय आयोग ने 12वीं पास के साथ एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा योग्यता मांगी थी, लेकिन बीसीए-एमसीए कर चुके अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया। कानूनी नोटिस में अभ्यर्थी ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को आधार बनाया है। इसमें कहा है कि आरएंडपी नियमों के तहत न्यूनतम योग्यता को दरकिनार कर ऊंची योग्यता रखने वाला अभ्यर्थी भर्ती के लिए पात्र नहीं हो सकता।
यह है जेओए भर्ती का मामला
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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पूर्व ऊंची शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अभ्यर्थी को अतिरिक्त अंक देना अवैध करार दिया है। पोस्ट कोड 556 के तहत जेओए के 1156 पद भरने की प्रक्रिया ढाई वर्ष से लटकी है। इसका परिणाम शीघ्र घोषित करने को लेकर शिमला और हमीरपुर में भूख हड़ताल के अलावा जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। इनके बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले और कानूनी नोटिस के बाद आयोग ने अब मामला सरकार को क्लेरिफिकेशन के लिए भेज दिया है।
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कर्मचारी चयन आयोग ने अक्तूबर 2016 में जेओए के 704 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। बाद में पदों की संख्या बढ़ा दी गई। अब भर्ती 1156 पदों के लिए हो रही है। 53 विभागों में ये पद भरे जाने हैं। 28 अप्रैल, 2017 को स्क्रीनिंग परीक्षा हुई थी। एक अगस्त, 2017 को परिणाम घोषित हुआ। 14 सितंबर से 18 अक्तूबर 2017 तक टाइपिंग टेस्ट लिए गए। साढ़े तीन माह बाद 16 फरवरी, 2018 को इसका परिणाम निकाला गया। 3452 आवेदक पास हुए।
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इन्होंने 10 अप्रैल से 24 मई तक मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लिया। 16 मई, 2018 को प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी। 16 अगस्त को ट्रिब्यूनल ने जेओए रिजल्ट से रोक हटा दी। कुछ अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले गए। 28 अगस्त को हाईकोर्ट ने जेओए की भर्ती आरएंडपी नियमों के तहत करने के आदेश दिए। इससे कई कंप्यूटर डिप्लोमा धारक अयोग्य हो गए। अब मामले पर अगली सुनवाई 7 मार्च 2019 को प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में होनी है।
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जेओए पोस्ट कोड 556 के तहत 1156 पदों पर भर्ती मामला में सरकार को क्लेरिफिकेशन के लिए लिखा है। एक अभ्यर्थी ने सुप्रीमकोर्ट के ताजा फैसले को आधार बनाते हुए नोटिस भेजा है। अब मामले में कार्मिक और लॉ विभाग ही अंतिम फैसला ले सकेंगे। - डॉ. जितेंद्र कंवर, सचिव, हिप्र कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर
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