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ग्रेड पे विसंगति पर शिक्षकों ने दिखाया आक्रोश
Shimla
Updated Thu, 21 Aug 2014 05:30 AM IST
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शिमला। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के एक हजार से अधिक शिक्षक मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के बैनर तले बुधवार को शिक्षकों में निदेशालय में एक दिन का सांकेतिक धरना दिया। शिक्षा निदेशालय से सचिवालय कर विरोध रैली भी निकाली। शिक्षकों की प्रमुख मांगों में एसएमसी के माध्यम से अध्यापकों की नियुक्ति का फैसला वापस लेना, 1053 प्रवक्ता पद जो पैट (आईपी) में परिवर्तित किए हैं, को बहाल करना, पीटीजी पदनाम हटाकर प्रवक्ता पदनाम को बहाल करना शामिल है। इसके अलावा ग्रेड पे में विसंगतियों के कारण कैसे सीनियर शिक्षक जूनियर शिक्षकों से पीछे रहेंगे, इन सबको लेकर चर्चा की गई। धरने को प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र चौहान, महासचिव संजय कपूर, उपप्रधान सरोज मेहता के अलावा सभी जिला अध्यक्षों ने संबोधित किया। नरेश महाजन, महावीर कैंथला, नरोत्तम ठाकुर, पूर्व सचिव अजय शर्मा, रमेश शर्मा, डीपीई संघ के महासचिव रमेश ठाकुर, जेबीटी पीईटी के प्रधान प्रवीण शर्मा, टीजीटी आर्ट्स के पूर्व महासचिव देवराज शर्मा, सीएंडवी संघ से सूरज महाजन शामिल थे। विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने काले बिल्ले लगाकर निदेशालय से सचिवालय तक शांतिपूर्वक रैली निकाली। इसके बाद शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से उनके कार्यालय में मिला।
सीएम ने फिर वार्ता के लिए बुलाया
शिक्षकों की विरोध रैली सफल रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मांगों पर विचार-विमर्श किया और उन्हें पूरा करने के लिए दो महीने का समय दिया है। फिर से मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को मांगों पर चर्चा के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री के सकारात्मक रवैये के कारण डीपी ने भी अपना बायकाट वापस ले लिया है।
- विरेंद्र चौहान, अध्यक्ष हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ।
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सीएम ने फिर वार्ता के लिए बुलाया
शिक्षकों की विरोध रैली सफल रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मांगों पर विचार-विमर्श किया और उन्हें पूरा करने के लिए दो महीने का समय दिया है। फिर से मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को मांगों पर चर्चा के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री के सकारात्मक रवैये के कारण डीपी ने भी अपना बायकाट वापस ले लिया है।
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- विरेंद्र चौहान, अध्यक्ष हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ।