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उरनी गांव में भूस्खलन का खतरा सदन में गूंजा
Shimla
Updated Tue, 12 Aug 2014 05:30 AM IST
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शिमला। किन्नौर में जेपी और एसजेवीएनएल पावर प्रोजेक्ट की टनल में हो रहे रिसाव से उरनी गांव को बचाने के लिए सरकार की जियोलॉजिकल विंग ने छह महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सोमवार को सदन में हिलोपा के विधायक महेश्वर सिंह की ओर से उठाए गए सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने विधानसभा में यह जानकारी दी। साथ ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी सदन को अवगत कराया कि स्थानीय लोगों की मदद के लिए सरकार की ओर से हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
सतलुज नदी में तेज बहाव के कारण भूस्खलन हुआ था, जिस कारण प्राकृतिक झील बन गई। इस झील के खतरे को टालने के लिए प्रशासन के निर्देश पर कड़छम डैम से अधिक पानी छोड़ा गया, जिससे अस्थाई झील के पानी की निकासी सुचारू हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि उक्त गांव को बचाने के लिए छह महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। वे इस प्रकार हैं।
- कूहलाें को पक्का किया जाए, पानी का रिसाव रोका जाए
- सतलुज में न डाली जाई मिट्टी और पत्थर
- सेब के बगीचों की सिंचाई रोकी जाए
- सुरंग से सड़क का निर्माण किया जाए
- कड़छम डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ा जाए
- जीआईएस से उचित राय ली जाए
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सतलुज नदी में तेज बहाव के कारण भूस्खलन हुआ था, जिस कारण प्राकृतिक झील बन गई। इस झील के खतरे को टालने के लिए प्रशासन के निर्देश पर कड़छम डैम से अधिक पानी छोड़ा गया, जिससे अस्थाई झील के पानी की निकासी सुचारू हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि उक्त गांव को बचाने के लिए छह महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। वे इस प्रकार हैं।
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- कूहलाें को पक्का किया जाए, पानी का रिसाव रोका जाए
- सतलुज में न डाली जाई मिट्टी और पत्थर
- सेब के बगीचों की सिंचाई रोकी जाए
- सुरंग से सड़क का निर्माण किया जाए
- कड़छम डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ा जाए
- जीआईएस से उचित राय ली जाए