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सोनिया के कान में कौल सिंह ने क्या कहा?
Shimla
Updated Sat, 24 May 2014 05:35 AM IST
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शिमला। हिमाचल कांग्रेस के नेताओं में ‘शीत युद्ध’ के बीच सोनिया गांधी के कान में कौल सिंह ठाकुर ने आखिर क्या फूंक डाला? मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बाद स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर भी सोनिया गांधी से मिले हैं। वीरभद्र वीरवार और कौल सिंह ठाकुर शुक्रवार को मिले। कौल सिंह ने अहमद पटेल से भी मुलाकात की।
कौल की इस भेंट को वीरभद्र विरोधी खेमे की एक और हलचल माना जा रहा है। कांग्रेस के विपक्ष में रहते हिमाचल में इस पार्टी के दो खेमे थे। एक वीरभद्र खेमा था तो दूसरा कौल सिंह गुट। ये दोनों ही खेमे एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले थे। तब वीरभद्र और कौल सिंह कई बार एक-दूसरे के आमने सामने हुए। वीरभद्र खेमे ने तो कौल सिंह ठाकुर को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम तक चलाई। कौल सिंह ने हाईकमान के कहने पर एक झटके में ही यह पद छोड़ दिया था। बाद में सरकार बनी तो मंत्री बनने से कौल सिंह खामोश हो गए। इन दिनों जहां वीरभद्र के नेतृत्व की सरकार के खिलाफ कई कांग्रेस नेताओं ने गुपचुप मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में कौल सिंह की राहुल गांधी से हुई भेंट के भी ऐसे ही कई मायने निकाले जा रहे हैं।
कौल सिंह ठाकुर ने माना है कि वह शुक्रवार दोपहर बाद सोनिया गांधी से मिले हैं। उन्होंने सोनिया से कहा कि प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह उनके साथ है। उन्हें भरोसा दिलाया कि हिमाचल में संगठन और सरकार मिलकर काम करेंगे। कौल सिंह बोले कि प्रदेश सरकार के नेतृत्व पर उनकी कोई बात नहीं हुई।
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हमारी मुलाकातोें के गलत अर्थ न निकालें : आशा, विप्लव
शिमला। आशा कुमारी ने कहा कि धूमल का यह दावा गलत है कि कांग्रेस के आठ विधायक उनके संपर्क में हैं। हालांकि, यह चिंताजनक है कि डेढ़ साल प्रदेश कांग्रेस सरकार रहते हुए भी पार्टी चारों सीटें कैसे हारी? आशा बोलीं, वीरभद्र उनके पिता समान हैं, वे तो उनके बारे में कुछ भी कह सकते हैं। बतौर एआईसीसी सचिव उनका कांग्रेस आलाकमान नेताओं से मिलना-जुलना जरूर होता रहता है। इसके मतलब निकालना गलत है। राज्यसभा सदस्य विप्लव ठाकुर ने कहा कि वह अंबिका सोनी के साथ बैठी थीं तो वीरभद्र और मुकेश भी वहां आ गए थे। राज्यसभा में होने के नाते अंबिका सोनी से मिलना तो होता ही रहता है। इसके अलग मतलब क्यों निकाले जा रहे हैं?
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कौल की इस भेंट को वीरभद्र विरोधी खेमे की एक और हलचल माना जा रहा है। कांग्रेस के विपक्ष में रहते हिमाचल में इस पार्टी के दो खेमे थे। एक वीरभद्र खेमा था तो दूसरा कौल सिंह गुट। ये दोनों ही खेमे एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले थे। तब वीरभद्र और कौल सिंह कई बार एक-दूसरे के आमने सामने हुए। वीरभद्र खेमे ने तो कौल सिंह ठाकुर को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने की मुहिम तक चलाई। कौल सिंह ने हाईकमान के कहने पर एक झटके में ही यह पद छोड़ दिया था। बाद में सरकार बनी तो मंत्री बनने से कौल सिंह खामोश हो गए। इन दिनों जहां वीरभद्र के नेतृत्व की सरकार के खिलाफ कई कांग्रेस नेताओं ने गुपचुप मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में कौल सिंह की राहुल गांधी से हुई भेंट के भी ऐसे ही कई मायने निकाले जा रहे हैं।
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कौल सिंह ठाकुर ने माना है कि वह शुक्रवार दोपहर बाद सोनिया गांधी से मिले हैं। उन्होंने सोनिया से कहा कि प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह उनके साथ है। उन्हें भरोसा दिलाया कि हिमाचल में संगठन और सरकार मिलकर काम करेंगे। कौल सिंह बोले कि प्रदेश सरकार के नेतृत्व पर उनकी कोई बात नहीं हुई।
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हमारी मुलाकातोें के गलत अर्थ न निकालें : आशा, विप्लव
शिमला। आशा कुमारी ने कहा कि धूमल का यह दावा गलत है कि कांग्रेस के आठ विधायक उनके संपर्क में हैं। हालांकि, यह चिंताजनक है कि डेढ़ साल प्रदेश कांग्रेस सरकार रहते हुए भी पार्टी चारों सीटें कैसे हारी? आशा बोलीं, वीरभद्र उनके पिता समान हैं, वे तो उनके बारे में कुछ भी कह सकते हैं। बतौर एआईसीसी सचिव उनका कांग्रेस आलाकमान नेताओं से मिलना-जुलना जरूर होता रहता है। इसके मतलब निकालना गलत है। राज्यसभा सदस्य विप्लव ठाकुर ने कहा कि वह अंबिका सोनी के साथ बैठी थीं तो वीरभद्र और मुकेश भी वहां आ गए थे। राज्यसभा में होने के नाते अंबिका सोनी से मिलना तो होता ही रहता है। इसके अलग मतलब क्यों निकाले जा रहे हैं?