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इस पानी से तो वीआईपीज भी डरते हैं
Shimla
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:31 AM IST
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शिमला। शहर में फैल रहे पीलिया को लेकर मंगलवार को ‘अमर उजाला’ ने वीआईपीज के कार्यालयों और आवासों का जायजा लिया। यहां आकर पता चला कि स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार लोग भी सीधी सप्लाई का पानी पीने से डरते हैं। हमने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, महापौर कार्यालय और विधायकों के सरकारी आवासों का जायजा लिया।
आम शहरी को शुद्ध पानी देने का दावा करने वाले खुद नलके का पानी पीने से खौफ खा रहे हैं। जिनके जिम्मे शहरवासियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है, वे वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर (वाटर प्यूरिफायर) के बिना एक बूंद अपनी हलक से नीचे नहीं उतराते। डरते हैं कि कहीं बीमारी का शिकार न हो जाए। सभी के कार्यालयों में वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर लगे हुए हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य महकमे के कार्यालय में कोई भी बिना फिल्टर पानी नहीं पीता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके गुप्ता बताते हैं कि हम लोगों को जागरूक करते हैं, पानी हमेशा उबालकर पीएं। कार्यालय में वाटर फिल्टर है, इसका वह इस्तेमाल करते हैं। नगर निगम के महापौर संजय चौहान कहते हैं कि कार्यालय में जरूर इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर में वह उबालकर पानी पीते हैं। लोगों से आग्रह है कि वे भी एहतियात बरतें। विधायकों के सरकारी आवास में भी वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर का ही इस्तेमाल होता है। विधायक आवास में रहने वाले गोंबिद सिंह ठाकुर ने कहा कि वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर का इस्तेमाल कर ही पानी का इस्तेमाल करते हैं।
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आगे भी बनी रहेगी दूषित पेयजल समस्या
विशेषज्ञ बताते हैं जब तक शहर में सीवरेज व्यवस्था को लेकर फूल परूफ मैकेनिज्म नहीं अपनाया जाता। राजधानी में दूषित पेयजल की समस्या बनी रहेगी। आधे शहर में न तो अभी सीवरेज सिस्टम है और न ही रिसती सीवरेज लाइनों को रोकने के सही इंतजाम। इससे पानी में मिलती सीवरेज की गंदगी से स्थिति बेकाबू होती जा रही है। इसके अलावा उपनगरों को आपूर्ति कर रही पेयजल योजनाओं पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। उससे भी पीने का पानी दूषित हो रहा है।
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इन इलाकों के लोग सीवरेज सुविधा से वंचित
शिमला के टुटू , ढली, इंद्र नगर , न्यू शिमला, मल्याणा, कुफ्टाधार व टुटू इत्यादि क्षेत्रों में लोग सीवरेज सुविधा से अब तक वंचित है। इन क्षेत्रों में अधिकतर लोग अभी भी सेप्टिक टैंक प्रयोग में ला रहे हैं। बारिश होते ही ये लोग अपने सेप्टिक टैंक खोल देते हैं जो पेयजल स्त्रोत में जा मिलते हैं। इस कारण जलजनित रोग शहर में फैल जाता है।
शिमला शहर में सीवरेज के केवल 12415 कनेक्शन
शिमला में नगर निगम व आईपीएच विभाग ने कुल 12415 सीवरेज के कनेक्शन जारी किए हैं। जबकि राजधानी में भवन की संख्या 25 हजार के करीब है। ऐसे में करीब 13 हजार भवन मालिकों के पास सीवरेज के कनेक्शन नहीं हैं।
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आम शहरी को शुद्ध पानी देने का दावा करने वाले खुद नलके का पानी पीने से खौफ खा रहे हैं। जिनके जिम्मे शहरवासियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है, वे वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर (वाटर प्यूरिफायर) के बिना एक बूंद अपनी हलक से नीचे नहीं उतराते। डरते हैं कि कहीं बीमारी का शिकार न हो जाए। सभी के कार्यालयों में वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर लगे हुए हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य महकमे के कार्यालय में कोई भी बिना फिल्टर पानी नहीं पीता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके गुप्ता बताते हैं कि हम लोगों को जागरूक करते हैं, पानी हमेशा उबालकर पीएं। कार्यालय में वाटर फिल्टर है, इसका वह इस्तेमाल करते हैं। नगर निगम के महापौर संजय चौहान कहते हैं कि कार्यालय में जरूर इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर में वह उबालकर पानी पीते हैं। लोगों से आग्रह है कि वे भी एहतियात बरतें। विधायकों के सरकारी आवास में भी वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर का ही इस्तेमाल होता है। विधायक आवास में रहने वाले गोंबिद सिंह ठाकुर ने कहा कि वाटर इलेक्ट्रिक फिल्टर का इस्तेमाल कर ही पानी का इस्तेमाल करते हैं।
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आगे भी बनी रहेगी दूषित पेयजल समस्या
विशेषज्ञ बताते हैं जब तक शहर में सीवरेज व्यवस्था को लेकर फूल परूफ मैकेनिज्म नहीं अपनाया जाता। राजधानी में दूषित पेयजल की समस्या बनी रहेगी। आधे शहर में न तो अभी सीवरेज सिस्टम है और न ही रिसती सीवरेज लाइनों को रोकने के सही इंतजाम। इससे पानी में मिलती सीवरेज की गंदगी से स्थिति बेकाबू होती जा रही है। इसके अलावा उपनगरों को आपूर्ति कर रही पेयजल योजनाओं पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। उससे भी पीने का पानी दूषित हो रहा है।
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इन इलाकों के लोग सीवरेज सुविधा से वंचित
शिमला के टुटू , ढली, इंद्र नगर , न्यू शिमला, मल्याणा, कुफ्टाधार व टुटू इत्यादि क्षेत्रों में लोग सीवरेज सुविधा से अब तक वंचित है। इन क्षेत्रों में अधिकतर लोग अभी भी सेप्टिक टैंक प्रयोग में ला रहे हैं। बारिश होते ही ये लोग अपने सेप्टिक टैंक खोल देते हैं जो पेयजल स्त्रोत में जा मिलते हैं। इस कारण जलजनित रोग शहर में फैल जाता है।
शिमला शहर में सीवरेज के केवल 12415 कनेक्शन
शिमला में नगर निगम व आईपीएच विभाग ने कुल 12415 सीवरेज के कनेक्शन जारी किए हैं। जबकि राजधानी में भवन की संख्या 25 हजार के करीब है। ऐसे में करीब 13 हजार भवन मालिकों के पास सीवरेज के कनेक्शन नहीं हैं।