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अब नाना नाती और बेटी को स्वाइन फ्लू
Shimla
Updated Wed, 27 Feb 2013 05:31 AM IST
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शिमला। शहर में मां -बेटी के बाद अब नाना-नाती और बेटी स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई हैं। ढली में रहने वाले इस परिवार के सभी सदस्यों को टैमी फ्लू दी जा चुकी है। महिला की उम्र 28 साल और उसके बेटे की उम्र डेढ़ साल हैं। महिला के पिता में सबसे पहले स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए। इनका आईजीएमसी में उपचार चल रहा है। यह परिवार ढली में एक निजी स्कूल के भवन के समीप बने मकान में रहता है। स्कूल प्रबंधक हरनाम सिंह ने बताया कि यहां आठवीं तक कक्षाएं चलती हैं। पड़ोस में स्वाइन फ्लू के मामले आने पर ऐतिहात के तौर पर दो दिन की छुट्यिां दी गई है। मौजूदा समय में आईजीएमसी में चार मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक 113 संदिग्ध मरीज आए हैं इनमें से 22 पॉजिटिव पाए गए हैं। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि एक महिला और उसके डेढ़ साल के बेटे में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए हैं।
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ थाए उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल हैए हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है।
कैसे फैलता है
जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं। वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन दरवाजे, फोन व कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं। अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।
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क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ थाए उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल हैए हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है।
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कैसे फैलता है
जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं। वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन दरवाजे, फोन व कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं। अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।
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