International Women's Day 2025: महिलाओं के 5 अधिकार, जो उनकी जिंदगी की मुश्किलों को कर सकते हैं दूर
भारतीय संविधान महिलाओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है, जो उन्हें समानता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। महिला दिवस के मौके पर यहां संविधान द्वारा दिए गए पांच ऐसे अधिकारों के बारे में बताए जा रहे हैं, जो हर महिला को जरूर जानने चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
International Women's Day 2025: महिलाओं के अधिकारों और समानता की पेरवी करते हुए हर साल महिला दिवस मनाया जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को शिक्षा, करियर या किसी भी क्षेत्र में समान अवसर मिल सकें, इस बात को सुनिश्चित करते हुए 8 मार्च का दिन महिलाओं के नाम समर्पित कर दिया गया। इसी के साथ महिलाओं को उनके योगदान, परिवार व समाज में उनकी भूमिका के लिए सम्मानित करना भी महिला दिवस का उद्देश्य है।
भारतीय महिलाओं की स्थिति में पहले से काफी बदलाव आया है। पर्दे के पीछे रहने वाली महिलाएं अब शिक्षा और करियर को लेकर अग्रसर हो रही हैं। हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके जीवन से जुड़े फैसले आज भी वह खुद नहीं ले सकती हैं। अधिकतर महिलाएं अपने फैसलों के लिए परिवार या पति की अनुमति पर आश्रित होती हैं। वहीं कई महिलाओं को तो उनके अधिकारों के बारे में जानकारी ही नहीं होती। चाहें पिता का घर हो या पति का घर, दफ्तर हो या बच्चों का पालन पोषण , एक महिला को इन सभी जगहों का खास अधिकार मिलें हैं, जिसकी जानकारी न होने के कारण उनका जीवन अनुमति पर निर्भर रहता है।
भारतीय संविधान (Indian Constitution) महिलाओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है, जो उन्हें समानता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। महिला दिवस के मौके पर यहां संविधान द्वारा दिए गए पांच ऐसे अधिकारों (Women Rights) के बारे में बताए जा रहे हैं, जो हर महिला को जरूर जानने चाहिए।
संविधान में महिलाओं के लिए अधिकार
1. घरेलू हिंसा से सुरक्षा
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत, महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक शोषण से सुरक्षा मिलती है। महिलाएं पुलिस, महिला हेल्पलाइन या अदालत में शिकायत दर्ज कराकर कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
2. समान वेतन का अधिकार
कामकाजी महिलाओं को दफ्तर में पुरुषों के समान काम के लिए बराबर वेतन मिलना चाहिए। समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के तहत महिलाओं को समान काम पर पुरुषों के समान वेतन पाने का अधिकार है। अगर किसी महिला को उसके पुरुष सहकर्मी की तुलना में कम वेतन दिया जाता है, तो वह न्याय के लिए श्रम अदालत में जा सकती है।
3. मातृत्व लाभ का अधिकार
मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत, कामकाजी महिलाओं को मां बनने की स्थिति में 6 महीने का मातृत्व अवकाश प्राप्त करने का अधिकार है। इस दौरान कंपनी उनके वेतन में कोई कटौती नहीं कर सकती है और उन्हें नौकरी से भी निकाल नहीं सकती है। यह कानून महिलाओं को नौकरी में सुरक्षा और बच्चे की सही देखभाल का अवसर देता है।
4. संपत्ति का अधिकार
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार, पिता की संपत्ति या पुश्तैनी संपत्ति पर बेटे या बेटी दोनों का समान अधिकार है। शादी के बाद भी महिला अपने माता-पिता की संपत्ति पर दावा कर सकती है।
5. यौन शोषण से सुरक्षा का अधिकार
कामकाजी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए अधिनियम के तहत अधिकार दिया गया है। हर कंपनी और संगठन में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का होना अनिवार्य है, जहां महिलाएं शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
इसके अलावा यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को अपनी पहचान गोपनीय रखने का भी अधिकार है। केवल जिला मजिस्ट्रेट या महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में पीड़ित महिला अपना बयान दर्ज करा सकती है।

कमेंट
कमेंट X