{"_id":"67ece893a18f821fac0006c4","slug":"who-is-seema-kumari-from-jharkhand-secured-full-scholarship-to-harvard-university-2025-04-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Inspiring: झारखंड के छोटे से गांव से हावर्ड तक कैसे पहुंचीं सीमा कुमारी, प्रेरणादायक है इनकी कहानी","category":{"title":"Shakti","title_hn":"शक्ति","slug":"shakti"}}
Inspiring: झारखंड के छोटे से गांव से हावर्ड तक कैसे पहुंचीं सीमा कुमारी, प्रेरणादायक है इनकी कहानी
Wed, 02 Apr 2025 01:34 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Wed, 02 Apr 2025 01:34 PM IST
सार
सीमा कुमारी का जन्म झारखंड के दाहू गांव में हुआ, जो आर्थिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। उनके माता-पिता किसान हैं और उनके परिवार में शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था।
विज्ञापन
सीमा कुमारी
- फोटो : Instagram /IIM Ranchi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Seema Kumari From Jharkhand : झारखंड के छोटे से गांव दाहू की बेटी सीमा कुमारी ने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। सीमित संसाधनों और कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी तक अपनी राह तलाश ली जहां, रतन टाटा, राजीव गांधी और आनंद महिंद्रा और बराक ओबामा जैसे दिग्गजों ने पढ़ाई की थी। सीमा कुमारी का सफर संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सफलता की एक शानदार कहानी है। दाहू गाँव इस बेटी ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे झारखंड और भारत का मान बढ़ाया है।
विज्ञापन
दरअसल, छोटे से गांव की रहने वाली सीमा ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पूरी छात्रवृत्ति प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका यह सफर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुका है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि सच्ची मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। आइए जानते हैं झारखंड की बेटी सीमा कुमारी हावर्ड यूनिवर्सिटी तक कैसे पहुंचीं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Maithili Mrinalini: पटना विवि छात्र संघ की पहली महिला अध्यक्ष कौन हैं, जानें मैथिली मृणालिनी के बारे में
विज्ञापन
सीमा कुमारी की पारिवारिक पृष्ठभूमि
सीमा कुमारी का जन्म झारखंड के दाहू गांव में हुआ, जो आर्थिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। उनके माता-पिता किसान हैं और उनके परिवार में शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था। गांव में संसाधनों की कमी के बावजूद, सीमा ने बचपन से ही शिक्षा के प्रति गहरी रुचि दिखाई।
खेल और शिक्षा के प्रति सीमा की रुचि
सीमा की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने YUWA NGO से जुड़कर फुटबॉल खेलना शुरू किया। YUWA संगठन झारखंड की लड़कियों को खेल और शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाता है। 2012 में इस फुटबॉल टीम में शामिल होने के बाद सीमा ने खेल के साथ-साथ नेतृत्व कौशल भी विकसित किया।
फुटबॉल खेलने के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, इसलिए उन्होंने फुटबॉल कोच के रूप में काम किया ताकि पढ़ाई के लिए फीस जुटा सकें।
सीमा को मिला हावर्ड में दाखिला
सीमा की मेहनत और लगन रंग लाई जब उन्हें कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दाखिला मिला। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि उन्होंने हावर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विषय में पढ़ाई के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति प्राप्त की।

कमेंट
कमेंट X