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लॉकडाउन के समय का उपयोग कर बनाया विश्व रिकार्ड, कलाकृति के माध्यम से इस बेटी ने दिया विश्व शांति का संदेश
Sat, 06 Jun 2020 09:14 AM IST
अपराजिता शुक्ला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अपराजिता शुक्ला
Updated Sat, 06 Jun 2020 09:14 AM IST
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Ritika Singh
- फोटो : अमर उजाला।
कोरोना महामारी ने जहां पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है। वहीं भारत भी इससे अछुता नजर ऩहीं आया। अपने देश में कोरोना वायरस से बचने के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया गया। जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था तक हिल गई है। वहीं इस लॉकडाउन में आम जन को भी काफी तकलीफों का सामना करना पड़़ा लेकिन इस खतरनाक वायरस से बचने का यहीं एकमात्र तरीका ही है। दुनियाभर में फैले इस अशांति के माहौल में उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले की एक लड़की ने लोगों को शांति का संदेश दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला।
यह केवल शांति संदेश ही नहीं बल्कि लॉकडाउन में खाली समय को सदुपयोग करने का भी संदेश देती दिख रही हैं। महाराजगंज की होनहार बेटी रितिका सिंह ने घर पर बैठकर लॉकडाउन के वक्त में कलाकृति के माध्यम से यह संदेश दिया है। रितिका ने विश्व शांति संदेश देने के लिए 14 मीटर रक्षा सूत्र के माध्यम से 20 मीटर कपड़े पर 18 भाषाओं में 'लोकाः समस्ताः सुखिनो भवंतु' का कलाकृति बना कर सभी युवाओ के लिए मार्ग दर्शक बनी। जिसे वर्ल्ड रिकार्ड संस्था ने विश्व रिकार्ड मानते हुए सूची में जगह दी है।
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महाराजगंज के आनंदनगर कस्बे के निवासी राधेश्याम सिंह की बेटी रितिका ने बताया कि पूरी दुनिया में कोरोना के कारण तबाही फैली हुई है। ऐसे में अपने गुरू डॉ. जगदीश पिल्लई से प्रेरणा लेकर उसने 14 मीटर कपड़े पर मात्र 36 दिन में 18 भाषाओं में 'लोकाः समस्ताः सुखिनो भवंतु' ( दुनिया में सभी लोग खुश रहे ) लिख कर ये कारनामा कर दिखाया। 18 भाषाओं जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी, गुजराती, श्रीलंका, अरबी, उर्दू, मैथली, नेपाली, मलयालम, पंजाबी, मराठी, उड़िया व तमिल आदि भाषा कुंडली डिजाइन में लिखी गई है। जिसे उनके गुरू ने वर्ल्ड रिकार्ड इंडिया में भेजा था। जिसे स्वीकार कर लिया गया और इस कलाकृति को शामिल कर लिया गया।

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