इंजीनियर बनने का ख्वाब छोड़ शुरू किया स्टार्टअप, ग्रामीण महिलाओं को सस्ते में बेचती हैं पैड
सुहानी मोहन ने इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी खासी नौकरी छोड़ अपना स्टार्ट-अप शुरू किया। मुंबई की रहने वाली सुहानी ने माहवारी के दिनों में स्वच्छता और जागरुकता फैलाने के लिए अपनी कंपनी की स्थापनी की और सस्ते में पैड्स ग्रामीण बालिकाओं और महिलाओं को बांटने शुरू किए। उनके इस स्टार्ट-अप में पार्टनर कार्तिक मेहता ने सीधे महिलाओं से संपर्क कर जागरुकता फैलाने का काम किया। तो चलिए जानें सुहानी मोहन की स्टार्टअप शुरू करने की कहानी।
सुहानी ने बांबे आईआईटी से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद डचेज बैंक में वांलटियर के तौर पर कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी में काम करना शुरू किया। वहीं पर काम करते हुए सुहानी ने भारत में माहवारी के दौरान स्वच्छता की स्थितियों के बारे में सुना। जहां पर उन्हें पता चला कि करीब 70 फीसदी महिलाओँ को प्रजनन से जुड़ी संक्रमण की बीमारियां है। जिसका कारण ज्यादातर माहवारी के समय साफ-सफाई न रखना था। जहां से सुहानी को सरल स्टार्ट-अप शुरू करने का आइडिया आया।
सरल स्टार्ट-अप के तहत एक पैड करीब सात रुपये का पड़ता है। जिसे वो गांवों की महिलाओं को बेचती हैं। सुहानी बताती हैं कि काफी रिसर्च के बाद उन्होने डिस्ट्रिब्यूशन की लागत को कम किया है। क्योंकि वो पैड बेचने के साथ ही महिलाओं में जागरुकता भी फैलाती हैं। सुहानी बताती हैं कि सस्ते में चक्कर में वो कभी भी क्वालिटी से समझौता नहीं करती हैं।

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