नारी है शक्ति का प्रतीक जो ठान ले वो करके दिखाती है, साधारण महिला की असाधारण कहानी
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नारी को शक्ति का प्रतीक यूं ही नहीं कहा जाता है। अगर वो कुछ ठान ले तो कर के दिखाती है। ऐसी ही कुछ कहानी है राजस्थान की रश्मि शर्मा की। जिन्होंने परिवार के मना करने के बावजूद अपने दम पर कारोबार शुरू किया और इसे सफलता की ऊंचाईयों पर भी पहुंचाया।
राजस्थान के कोठपुतली की निवासी रश्मि शर्मा आठ साल पहले गुरुग्राम अपने पति के साथ आईं थी। सीकर राजस्थान से स्कूल और कॉलेज की शिक्षा प्राप्त करने वाली रश्मि का हमेशा से ख्वाब बिजनेस करने का था। लेकिन घर की हालत ऐसी नहीं थी कि वो बिजनेस में पैसे लगा सकें।
इसलिए उन्होंने घर वालों की सलाह पर एक-दो जगह नौकरी भी की। लेकिन कुछ ही दिनों बाद नौकरी छोड़ दी। गुरुग्राम में आने के बाद रश्मि ने अपने आसपास के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके साथ ही वो कुछ झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को भी शिक्षा देती थीं। साल 2014 में उन्होंने धीरे-धीरे इंस्टीट्यूट बना लिया।
यहां रूटीन में ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ स्लम के बच्चों को भी पढ़ाने लगीं, जिनकी संख्या आज 125 तक पहुंच गई है। वह लगातार अपने पति से व्यवसाय करने की इच्छा जतातीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह उसे नौकरी करने की सलाह देते। स्वयं को मजबूत करने के लिए पति की सलाह पर उन्होंने करीब 2 साल तक विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियों और स्कूलों में इंटरव्यू दिए।
इसी बीच वर्ष 2017 में उनके पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने रश्मि को सर्जिकल सामान का व्यवसाय करने की सलाह दी। इस व्यक्ति ने अपना व्यवसाय ही रश्मि को सौंपने की बात कही। खास बात यह थी कि जो कंपनी रश्मि को सौंपने की बात की गई उस पर लाखों का कर्जा था, लेकिन हिम्मत दिखाते हुए रश्मि ने उसे टेकओवर कर लिया। अपनी बचत और बैंक से उधार लेकर उन्होंने सर्जिकल इंप्लांटस उद्योग में किस्मत आजमाई और दिन रात एक करके उन्होंने इसे महज डेढ़ साल में आसमान की बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
रश्मि ने बताया कि करोड़ों रुपये का टर्नओवर होने के दौरान अनेक प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें परास्त करने का भी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं झुकीं। कुछ लोगों ने करीब 6 महीने पहले उन्हें करोड़ों रुपये का अर्थिक नुकसान भी पहुंचाया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर गुरुग्राम में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। आज उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक का है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा अपनी पहचान बनाना नहीं बल्कि महिलाओं को इस तरह से सशक्त करना है कि वह शहर में अपनी अलग पहचान बना सकें।

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