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Neerja Bhanot: अशोक चक्र से सम्मानित पहली महिला के साहस की कहानी, बहादुरी के लिए हर कोई करता है सलाम

Thu, 07 Sep 2023 11:10 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 07 Sep 2023 11:10 AM IST
सार

1986 को भारत का प्लेन हाईजैक हुआ तो नीरजा ने आतंकियों का सामना डटकर किया और खुद का जान दांव पर लगाकर 360 लोगों की जान बचाई। नीरजा भनोट के जीवन को बड़े पर्दे पर फिल्म के रूप में भी उतारा जा चुका है।

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Neerja Bhanot Birth Anniversary 2023 Bravery Story Of Late Indian flight Attendant Neerja Bhanot in Hindi
नीरजा भनोट - फोटो : facebook

विस्तार

Neerja Bhanot Birth Anniversary 2023: आतंकियों के सामने साहस के खड़े होने का जज्बा देश के सिपाहियों और सैन्य अधिकारियों में होता है, जिसे इसके लिए ट्रेंड किया जाता है लेकिन एक साधारण महिला का सामना जब हथियारबंद आतंकियों से हो जाए और वह अपनी जान की परवाह किए बिना सैकड़ों जिंदगियों को बचाने की कोशिश करने लगे, तो वह कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि एक साहसी सिपाही बन जाती है। ऐसी ही एक महिला और उसके साहस की कहानी भारत के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। इस महिला का नाम नीरजा भनोट था। नीरजा भनोट कोई सैन्य कर्मचारी नहीं, न ही भारतीय रक्षा मंत्रालय में शामिल थीं। उन्होंने कोई सैन्य ट्रेनिंग नहीं ली थी लेकिन जब 1986 को भारत का प्लेन हाईजैक हुआ तो नीरजा ने आतंकियों का सामना डटकर किया और खुद का जान दांव पर लगाकर 360 लोगों की जान बचाई। नीरजा भनोट के जीवन को बड़े पर्दे पर फिल्म के रूप में भी उतारा जा चुका है। इस लेख के माध्यम से नीरजा भनोट के जन्मदिन के मौके पर उनके उस साहस की कहानी को याद करते हैं और उनकी बहादुरी को सलाम करते हैं।

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नीरजा भनोट का जीवन परिचय

नीरजा भनोट अशोक चक्र से सम्मानित पहली महिला हैं। उन्होंने 5 सितंबर 1986 में हुए प्लेन हाईजैक में बहादुरी का परिचय देते हुए सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी। नीरजा भनोट का जन्म पंजाबी परिवार में 7 सितंबर 1963 को हुआ था। बचपन चंडीगढ़ में बीता, वहीं के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से उन्होंने शुरुआती शिक्षा हासिल की। बाद में पूरे परिवार के साथ मुंबई शिफ्ट हो गईं। नीरजा ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की।
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नीरजा भनोट का परिवार

वह खुले ख्यालों की महिला थीं। 17 साल की नीरजा को रोक टोक और दबाव की जिंदगी स्वीकार नहीं थी। उन्हें मॉडलिंग का शौक था। 1985 में उनकी एक उद्यमी से शादी करा दी गईं लेकिन पति संग रिश्ते ठीक न होने के कारण वह शादी के दो महीने बाद ही उन से अलग हो गईं। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग शुरू की और करीब 22 विज्ञापनों में काम किया।
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नीरजा भनोट का करियर

वह बचपन से प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने के सपने देखती थीं। मॉडलिंग का शौक पूरा करने के बाद उन्होंने एयरलाइंस ज्वाइन कर ली। ट्रेनिंग के लिए नीरजा फ्लोरिडा और मयामी गईं।


हाईजैक की हीरो

जन्मदिन से दो दिन पहले 1986 में नीरजा मुंबई से अमेरिका जाने वाली फ्लाइट में बतौर सीनियर एटेंडेंट शामिल थीं। इस दौरान कराची से उड़ान भरने से पहले चार आतंकियों ने पूरे विमान को हाईजैक कर लिया और यात्रियों को गन प्वाइंट पर ले लिया। लेकिन उस रात नीरजा ने अपनी सूझबूझ से विमान का दरवाजा खोल दिया और सभी यात्रियों की जान बचाई। इस दौरान 5 सितंबर 1986 को आंतकियों की फायरिंग में नीरजा शहीद हो गईं।

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