Leila Seth: हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस लीला सेठ के बारे में जानें, ऐसे मिला 'मदर ऑफ लॉ' का खिताब
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आजाद भारत में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ। भारतीय जनतंत्र के तीन अंग न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका हैं। इन तीनों में ही महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है। आज न केवल संसद, राजनीतिक और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं ने स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि देश की न्यायपालिका में भी महिलाओं ने जिम्मेदारी उठा रखी है। देश में अब तक कई महिला चीफ जस्टिस बन चुकी हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस कौन थीं? उनके करियर की शुरुआत कैसे हुई। हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस के पद तक पहुंचने के लिए उन्हें कितना संघर्ष करना पड़ा। देश में पहली हाईकोर्ट महिला चीफ जस्टिस का नाम लीला सेठ है। लीला सेठ को देशभर में 'मदर ऑफ लाॅ' कहा जाता है। चलिए जानते हैं देश की मदर ऑफ लॉ चीफ जस्टिस लीला सेठ के बारे में।
कौन हैं लीला सेठ
लीला सेठ हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस थीं। उनका जन्म 1930 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में हुआ था। जब लीला महज 11 साल की थीं, तो उनके पिता का निधन हो गया था। लीला बचपन से पढ़ाई में होनहार थीं। उन्होंने अपनी शिक्षा को जारी रखते हुए दार्जिलिंग के एक स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की।
लीला सेठ का करियर
लीला सेठ ने बतौर स्टेनोग्राफर अपने करियर की शुरुआत की। इस बीच प्रेम सेठ नाम के शख्स से लीला की शादी हो गई। शादी के बाद वह पति के साथ लंदन चली गईं। लीला ने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे और परिवार की देखभाल करने के साथ ही लीला ने अपने करियर में आगे बढ़ने का सोचा और 27 साल की उम्र में लंदन बार परीक्षा में टाॅप किया। उसके बाद लीला भारत लौट आईं और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी।
चीफ जस्टिस बनने का सफर
लीला दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर जज नियुक्त हुईं। यहां उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को लेकर खूब काम किया। उसके बाद लीला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस नियुक्त हुईं। ये देश के इतिहास में पहली बार था कि कोई महिला हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनी हो। लीला सेठ निर्भया गैंगरेप के बाद गठित हुई जस्टिस वर्मा कमेटी का भी हिस्सा रह चुकी हैं। उन्होंने महिलाओं के साथ ही समलैंगिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्हें देश की मदर ऑफ लॉ माना जाता है। 83 साल की उम्र में मदर ऑफ लॉ लीला सेठ ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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