जानिए महिला सशक्तिकरण का साक्षात हस्ताक्षर शूटर दादी से जुड़ी बातें
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हाल ही में शूटर दादी के नाम से जानी जाने वाली चंद्रो तोमर का कोरोना से निधन हो गया है। चंद्रो मेरठ के एक अस्पताल में कोरोना के चलते भर्ती हुई थीं जिसके 4 दिन बाद 89 वर्ष की आयु में चंद्रो तोमर ने इस दुनिया को अलविदा कह डाला। इस वजह से उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर बहुत ज्यादा दुखी हैं क्योंकि उन्होंने शूटर दादी के रूप में न सिर्फ अपनी जेठानी को खोया बल्कि वे अपने बहुत अच्छे साथी को खो चुकी हैं। जानिए शूटर दादी चंद्रो तोमर से जुड़ी कुछ बातें।
कभी स्कूल नहीं गईं
आज शूटर दादी को भले ही पूरा विश्व जानता है लेकिन वे शिक्षा प्राप्त करने कभी स्कूल नहीं गईं। उत्तरप्रदेश के बागपत जिले में 1 जनवरी 1932 को चंद्रो तोमर का जन्म हुआ। मात्र 15 साल की उम्र में उनका ब्याह हो गया और उसके बाद उन्होंने 5 बच्चों का पालन-पोषण किया।
पोती को चलाकर दिखाई राइफल
चंद्रो तोमर की पोती ने एकबार राइफल सीखने के लिए कोचिंग जॉइन की, जहां उसे अकेले जाने में डर लगता था तो दादी चंद्रो उसके साथ गई। वहां जब पोती ने ठीक से राइफल नहीं चलाई तो चंद्रो ने उन्हें राइफल चलाकर दिखाई जिसे देखकर ट्रेनर और वहां मौजूद अन्य लोग काफी हैरान हो गए।
उम्र महज संख्या रह गई
जिस उम्र में बुजुर्ग सारी मोह-माया त्याग देते हैं, उस उम्र में शूटर दादी ने शार्प शूटिंग में अपने करियर की शुरुआत की। इस उम्र में उन्होंने देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई। दिल्ली में हुए एक मुकाबले में डीआईजी भी उनसे हार गए थे।

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