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Jane Austen: छद्म नाम से उपन्यास लिखने वाली जेन ऑस्टन ने ऐसे हासिल किया लेखन के क्षेत्र में मुकाम
Sun, 17 Jul 2022 10:56 AM IST
स्वाति शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वाति शर्मा
Updated Sun, 17 Jul 2022 10:56 AM IST
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जेन ऑस्टन ने स्त्रियों की स्थिति के बारे में लिखा
- फोटो : Facebook
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किताबों की दुनिया बहुत ही अनोखी और खूबसूरत होती है। जो इस दुनिया से एक बार जुड़ता है उसके लिए कल्पना की परिभाषा असीमित हो जाती है। किताबे लिखने वाले के लिए भी अपने पाठक से जुड़ना उतना ही मजेदार अनुभव होता है। यही कारण है कि किताबें और कहानियां हमेशा के लिए पाठकों के मन में अमर हो जाते हैं। ऐसी ही एक लेखक हुई हैं 'जेन ऑस्टन'। मुख्यतः रोमांटिक फिक्शंस या रोम-कॉम लिख कर लोगों के दिल में जगह बनाने वाली जेन ऑस्टन आजकल अपनी उपन्यास पर्सुएशन पर बनी फिल्म की वजह से भी चर्चा में हैं।
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हालांकि यह फिल्म आलोचकों और दर्शकों के मन में जेन ऑस्टन के उपन्यासों की तुलना में बहुत कम जगह पा सकी है लेकिन इसके पाठकों के लिए यह एक क्लासिक उपन्यास रही है। अपनी बाकी उपन्यासों की ही तरह इस उपन्यास में भी जेन ने अंग्रेजी समाज का विवेचन और परिदृश्य सामने रखा है। लेकिन उपन्यास की तरह फिल्म लोगों के मन में जगह नहीं बना पाई। बताया यह भी जा रहा है कि फिल्म का ट्रेलर सामने आने के साथ ही जेन ऑस्टेन के फैंस ने इसे नकार दिया था। तो इस चर्चा के साथ आइए जानते हैं जेन ऑस्टेन के बारे में।
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ब्रिटिश मूल की जेन ऑस्टेन भरे-पूरे परिवार में 8 बच्चों में से सातवें नंबर पर थीं। अक्सर जब हम विदेशों की बात करते हैं तो हमें लगता है कि वहां महिलाओं और लड़कियों को लेकर बहुत खुले विचार और खुला ही माहौल होगा लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि चाहे देश कोई भी हो, नीति निर्धारक और नियम बनाने वाले तो पुरुष ही रहे हैं। अंग्रेज समाज भी इससे अलग नहीं रहा और इसका स्पष्ट उदाहरण जेन ऑस्टेन के उपन्यास की नायिकाओं में देखने को मिलता है।
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जेन ने अपनी लेखनी से उन तमाम सामाजिक स्थितियों को बड़े ही हल्के फुल्के तरीके से लेकिन मजबूती के साथ प्रस्तुत किया, जो उस दौर की महिलाओं के साथ जुडी थीं। उनकी नायिकाएं अधिकांशतः चतुर, समझदार और कुशल हुआ करती थीं जो ऊपरी सौंदर्य से आगे की बात कहती थीं। इसका एक उदाहरण जेन की उपन्यास प्राइड एन्ड प्रिज्यूडिस की नायिका एलिजाबेथ भी है, जो ऊपरी सौंदर्य की जगह गुणों को तरजीह देती है। उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास को जेन ने 'माय ओन डार्लिंग चाइल्ड' कहा था।
स्वयं जेन भी अपने आप में एक मिसाल रही हैं। जेन की शुरूआती शिक्षा उनके पिता और बड़े भाइयों द्वारा ही करवाई गई लेकिन जेन के पास अपनी किताबों का भी एक संसार था और उसने उन्हें खूब सिखाया। यही कारण था कि किशोरावस्था में ही जेन ने कहानियां, ड्रामा आदि लिखना शुरू कर दिया था। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उस दौर में लेखन का कार्य औरतों का काम नहीं माना जाता था। लेखन से कमाई करना तो और भी बड़ा पाप था। इसलिए जेन के शुरूआती उपन्यास छद्म नाम से छपे। उनका लिखा परिवार और दोस्तों के बीच पढ़ा जाता।
सबसे ख़ास बात यह कि उनकी लेखनी में सटीक कटाक्ष और ह्यूमर की भी जगह थी जो आमतौर पर पुरुषों के लेखन का विषय मानी जाती हैं। इसका एक कारण यह भी था कि लिखना- पढ़ना जेन को अपने परिवार से मिला था। उनकी माँ भी लिखा करती थीं और उनके दो बड़े भाई हास्य और मजाक से भरपूर एक साप्ताहिक अखबार की रचना किया करते थे। अपनी नायिकाओं की ही तरह जेन भी प्रेम में विश्वास करती थीं लेकिन केवल सामाजिक या परम्परागत निभाव के लिए शादी करना उन्हें मंजूर नहीं था। इसलिए वे ताउम्र अविवाहित ही रहीं। केवल 41 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह देने वाली जेन ने उपन्यासों के जरिये अपने आस पास के समाज को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। यह एक विडंबना है कि जेन की कृतियों को उनके जाने के बाद ज्यादा प्रसिद्धि मिली। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में सेन्स एन्ड सेंसिबिलिटी, मेंसफील्ड पार्क, प्राइड एन्ड प्रिज्यूडिस, एमा आदि शामिल हैं।

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