Praggnanandhaa Mother: कौन हैं नागलक्ष्मी, जिन्होंने भारत के लिए तैयार किया 'शतरंज का बाजीगर'
प्रगनाननंदा की मां नागलक्ष्मी के संघर्षों और बहन वैशाली की भूमिका के बारे में जानिए। दोनों ही उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने बेटे, भाई या पति की कामयाबी में उनके साथ खड़ी रहती हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं।
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R Praggnanandhaa Mother Nagalakshmi Life Story: 18 वर्ष के ग्रैंडमास्टर आर प्रगनाननंदा इन दिनों सुर्खियों में हैं। प्रगनाननंदा शतरंज के युवा खिलाड़ी हैं। हाल ही में उन्होंने फिडे विश्व कप शतरंज में हिस्सा लिया और सेमीफाइनल में दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी फैबियानो कारुआना को हराकर फाइनल में जगह बना ली थी। हालांकि प्रगनाननंदा को विश्वकप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा लेकिन देश का नाम इस टूर्नामेंट में रोशन करने वाले और बहुत कम उम्र में उपलब्धियां अपने नाम करने के लिए प्रगनाननंदा की तारीफ हो रही है।
प्रगनाननंदा के चर्चा में होने की एक वजह उनकी एक तस्वीर है जो सोशल मीडिया पर काफी पसंद की जा रही है। शतरंज खिलाड़ी प्रगनाननंदा की इस तस्वीर में वह इंटरव्यू देते दिख रहे हैं और पास में ही उनकी मां खड़ी हैं। इस तस्वीर को देख ये मुहावरा सच साबित होता नजर आता है कि एक कामयाब आदमी के पीछे एक महिला होती है। वैसे प्रगनाननंदा की सफलता में एक नहीं दो महिलाओं की विशेष भूमिका है। एक उनकी मां, जिन्होंने प्रगनाननंदा का हर कदम पर साथ दिया और प्रोत्साहित किया और दूसरी उन की बहन, जिस से उन्होंने शतरंज के गुण सीखें।
प्रगनाननंदा के बारे में तो हर कोई बात कर रहा, इस लेख में उनको सफलता की राह दिखाने वाली प्रगनाननंदा की मां नागलक्ष्मी के संघर्षों और बहन वैशाली की भूमिका के बारे में बताया जा रहा है। दोनों ही उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने बेटे, भाई या पति की कामयाबी में उनके पीछे खड़ी रहती हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती हैं।
प्रगनाननंदा की मां का नाम
शतरंज खिलाड़ी आर प्रगनाननंदा का जन्म 10 अगस्त 2005 को चेन्नई में हुआ। उनके पिता का नाम रमेशबाबू है जो बैंक में नौकरी करते हैं। पिता पोलियो से ग्रसित हैं लेकिन बच्चों के लालन पालन में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसमें उनका साथ पत्नी और प्रगनाननंदा की मां नागलक्ष्मी ने दिया।
नागलक्ष्मी की प्रगनाननंदा की सफलता में भूमिका
बचपन से ही जब भी प्रगनाननंदा किसी टूर्नामेंट के लिए जाते तो उन्हें लानेऔर ले जाने की जिम्मेदारी मां नागलक्ष्मी की होती थी। वह पूरा प्रयास करती कि बेटा अपनी प्रैक्टिस करें, घर पर प्रैक्टिस के लिए अनुकूल माहौल हो। घर से दूर होने पर प्रगनाननंदा को घर का बना खाना खाने को मिले।
नागलक्ष्मी को खुद शतरंज के खेल के बारे में अधिक नहीं पता लेकिन वह एक नजर में यह जान जाती हैं कि मैच के दौरान उनका बेटा कब आश्वस्त है और कब निराश। कई बार तो बेटे की घंटों ट्रेनिंग चलती हैं, तब भी नागलक्ष्मी कमरे के एक कोने में बैठी इंतजार करतीं और ट्रेनिंग खत्म होने के बाद घर पहुंचकर अपने काम निपटाती हैं।
प्रगनाननंदा की बहन
प्रगनाननंदा ने तीन वर्ष की आयु से ही शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। इसकी वजह उनकी बड़ी बहन वैशाली हैं। वैशाली को शतरंज का खेल पसंद था। वह शतरंज खेला करतीं, जिसे देख प्रगनाननंदा में भी शतरंज खेलने की इच्छा जागृत हुई। वैशाली भी भाई को टीवी पर कार्टून देखने से दूर रखना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने प्रगनाननंदा को शतरंज की चालें सिखाईं।
प्रगनाननंदा और वैशाली एक साथ प्रैक्टिस करते हैं। साथ में टूर्नामेंट के लिए जाया करते हैं। एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं। मां नागलक्ष्मी और बहन वैशाली के प्रयासों का परिणाम था कि साल 2018 में महज 12 वर्ष की आयु में प्रगनाननंदा ग्रैंडमास्टर बन गए। विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़ते हुए वह भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने। साथ ही प्रगनाननंदा दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बनें। पहले नंबर पर यूक्रेन के सिर्जी कर्जाकिन का नाम आता है, जो 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए थे।

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