Independence Day 2023: भारत-पाकिस्तान विभाजन में इस महिला की थी भूमिका, जानिए इंदरजीत कौर के बारे में
जब भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो सैकड़ों शरणार्थी आने लगे। उस समय इंदरजीत कौर ने अहम भूमिका निभाई और एक एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने लगीं। माता साहिब कौर दल का गठन किया और सचिव बनीं।
विस्तार
Independence Day 2023 Indrajit Kaur: 15 अगस्त 1947 में देश अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से आजाद हो गया। भारत की आजादी के लिए कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी जान का बलिदान दे दिया। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में कई महिलाएं शामिल थी, वहीं भारत पाकिस्तान विभाजन और आजादी के बाद भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने में भी महिलाओं का अभूतपूर्व योगदान रहा। इन्हीं महिलाओं में एक नाम इंदरजीत कौर का है। इंदरजीत कौर वह महिला हैं जिन्होंने उस दौर की महिलाओं के लिए बाहरी दुनिया के दरवाजे खोले और घर की चारदीवारी को पार करने के लिए प्रोत्साहित किया। इंदरजीत कौर के नाम के साथ 'पहला' शब्द जुड़ा है। वह कई क्षेत्रों में भारत की प्रथम महिला बनीं। भारत पाकिस्तान बंटवारे में उनका अहम योगदान रहा। साथ ही आजादी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी भूमिका है। आइए जानते हैं इंदरजीत कौर के बारे में।
कौन थीं इंदरजीत कौर
इंदरजीत कौर वह भारतीय महिला हैं जिनके नाम के साथ पहला शब्द जुड़ा है। वह अपने माता पिता की पहली संतान थीं। बाद में स्टाफ सेलेक्शन कमिशन, नई दिल्ली की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। इसके अलावा पंजाबी यूनिवर्सिटी की पहली महिला वाइस चांसलर नियुक्ति हुईं।
इंदरजीत कौर का जीवन परिचय
पंजाब के पटियाला जिले में 1 सितंबर 1923 को इंदरजीत कौर का जन्म कर्नल शेर सिंह संधू के घर पर हुआ। उनकी माता का नाम करतार कौर था। इंदरजीत कौर का परिवार उदारवादी और प्रगतिशील विचारधारा का था, जो बच्चों के विकास में पर्दा प्रथा जैसी रूढ़िवादी प्रचलित प्रथाओं को आने नहीं दिया।
इंदरजीत कौर की शिक्षा
परिवार ने बेटी इंदरजीत कौर को पढ़ने के लिए विक्टोरिया गर्ल्स स्कूल पटियाला से की। 10वीं की शिक्षा इस स्कूल से हासिल करने के बाद पिता का तबादला पेशावर में हो गया तो इंदरजीत आगे की पढ़ाई के लिए लाहौर चली गईं।
भारत-पाकिस्तान विभाजन में इंदरजीत की भूमिका
इस दौर जब भारत पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो सैकड़ों शरणार्थी आने लगे। उस समय इंदरजीत कौर ने अहम भूमिका निभाई और एक एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने लगीं। माता साहिब कौर दल का गठन किया और सचिव बनीं। उनके दल ने पटियाला में करीब 400 परिवारों का पुनर्वास करने में सहयोग किया। वह जरूरतमंदों को कपड़ा और राशन पहुंचाने का काम करती थीं
इंदरजीत कौर का सराहनीय कार्य
उन्होंने शरणार्थी लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिलाया। बाद में 1955 में पटियाला के स्टेट कॉलेज आफ एजुकेशन में प्रोफेसर बन गईं। उन दिनों उनकी छात्रा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर रहीं। 1958 में इंदरजीत कौर चंडीगढ़ के बेसिक ट्रेनिंग कॉलेज में प्रोफेसर आफ एजुकेशन नियुक्त हुईं। बाद में इसी कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल बनीं।
जिस कॉलेज (पटियाला सरकारी कॉलेज फार विमेन) से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, उसी की प्रिंसिपल बन गईं। तीन साल के भीतर उसी कॉलेज में साइंस विंग खुलवाया। इसके अलावा महिलाओं को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल कराने में इंदरजीत कौर की बड़ी भूमिका रही। पंजाबी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर बनने वाली वह पहली महिला बनीं। 1980 में केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए भर्ती करने वाली रिक्रूटमेंट एजेंसी स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की पहली महिला अध्यक्ष नियुक्त हुईं।

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