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लॉकडाउन ने बढ़ा दी महिलाओं की मुसीबत, सैनेटरी नैपकिन की आपूर्ति में आ रही बाधा

Sun, 24 May 2020 09:26 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sun, 24 May 2020 09:26 AM IST
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in survey woman says lockdown restricted to access to sanitary pads
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

मैंस्ट्रुअल हेल्थ एलाएंस इंडिया की ओर से कराए गए सर्वे में ये बात सामने आई है कि लॉकडाउन के कारण उन लड़कियों और महिलाओं के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है जो स्कूल और कॉलेजों से सैनेटरी नैपकिन की आपूर्ति पर निर्भर थीं। क्योंकि स्कूल और कॉलेजों के बंद हो जाने के कारण अब उन्हें हर महीने मिलने वाले सैनेटरी पैड्स उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। सर्वे में करीब 82 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उनके गांवों में और आसपास सैनेटरी पैड्स की आपूर्ति न के बराबर हो रही है। 

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सांकेतिक तस्वीर

केवल भारत ही नहीं बल्कि अफ्रीका जैसे देशों में इस आपूर्ति में बाधा पहुंची है। अप्रैल में कराए गए सर्वे में ये बात सामने आई है। डिस्पोसेबल पैड करीब 23 संगठनों के द्वारा बांटे जाते हैं। जिसको करीब 59 प्रतिशत महिलाएं इस्तेमाल करती हैं। सैनेटरी पैड्स की आपूर्ति में बाधा का अर्थ है कि बहुत सी महिलाएं और लड़कियां इस समय स्वच्छता की कमी की वजह से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान हो सकती हैं। इसका कारण है माहवारी के समय कपड़े का इस्तेमाल। गांवों में और कम आमदनी वाले घरों की लड़कियां सरकारी स्कूलों में मिलने वाले सैनेटरी पैड्स पर निर्भर रहती हैं। लेकिन लॉकडाउन में विद्यालयों के बंद होने के कारण उन्होंने कपड़े के पैड इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 



 
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MHAI के सर्वे में पता चला है कि केवल 25 प्रतिशत इकाईयां ही चल रही हैं और 50 प्रतिशत इकाईयां आधा उत्पादन कर रही हैं। जिसका कारण है पिछले तीन महीनों में कच्चे माल की आपूर्ति का बंद होना। केवल 24 प्रतिशत इकाईयों के पास मांग के अनुसार आपूर्ति का माल है। परिवहन की रोक और सड़कों के बंद होने के साथ ही नए उत्पादन के नियम भी इसका कारण हैं। वहीं मजदूरों के पलायन के साथ ही डिस्पोजेबल सैनेटरी पैड बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में लकड़ी के गूदे की आपूर्ति बड़ी चुनौतीपूर्ण है। 

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