कोरोना वीर: कोरोना से लड़ने के छोड़ दिया घर-परिवार का मोह, अब निभा रहीं अपना कर्तव्य
कोरोना के कहर से पूरी दुनिया बेहाल है। भारत में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में हर किसी को डर है, जिससे निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया है। कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए जो भी योद्धा लगे हुए हैं उनकी सामान्य जिंदगी पर भी असर पड़ा है। दिनभर ड्यूटी करने के बाद वो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। ऐसे में आज हम लेकर आएं हैं उन महिलाओं की कहानी जो देश के लिए कर्तव्य तो पूरा कर रही हैं लेकिन परिवार से दूरी बनाकर चल रही हैं।
कोरोना की ऐसी ही योद्धा हैं उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की। यहां के क्वारंटीन के जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. दीप्ति रावत हैं। जो लगातार छह घंटे तक इस अस्पताल में मरीजों को सेवाएं दे रही हैं। काम के सिलसिले में वो आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच करती हैं और साथ ही पहले से कोरोना पीड़ित की भी जांच और देखभाल करती हैं। इसी के साथ ही वो परिवारवालों के प्रति थोड़ा कम जिम्मेदारी निभा पा रही हैं क्योंकि उनको सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना पड़ रहा है।
इसी तरह से डीसीपी शालिनी बताती हैं कि उनका चार साल का बेटा सोचता है कि मम्मी बदल गई हैं। वो पहले की तरह मुझे खाना नहीं खिलाती हैं। वो बताती हैं कि समझाने पर समझ तो गया लेकिन कहता है कि मम्मी बदल गईं हैं।

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