Women’s Equality Day: पति की ऑनलाइन क्लासेस से मिला ऑनलाइन फूड बिजनेस का आइडिया, 72 वर्ष में शुरू किया व्यवसाय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती और सफलता की ओर बढ़ने में भी कभी उम्र बाधा नहीं बनती। यही कारण है कि कई लोगों ने उम्र के 50 वें पड़ाव पर आकर भी नई पारी की शुरुआत की और सफल हुए। ऐसे उदाहरण केवल किताबों में या फिल्मों ही देखने-पढ़ने को नहीं मिलते। हमारे आस-पास भी ऐसे कई सशक्त लोग मौजूद होते हैं जो खुद तो अपनी मंजिल पाते ही हैं, दूसरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। ऊषा श्रीवास्तव ऐसा ही एक नाम हैं।
मध्यप्रदेश के जबलपुर में 'मम्मीजी की रसोई' नाम से ऑनलाइन फ़ूड बिजनेस चलाने वाली ऊषा श्रीवास्तव सबके लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने उस उम्र में अपने सपने को पूरा करने के लिए दौड़ लगाई जब लोग रिटायरमेंट के बाद घर की चारदीवारी तक खुद को सीमित कर लेते हैं। बड़ी बात यह कि भरे पूरे परिवार की ऊषा श्रीवास्तव के साथ ऐसा करना कोई मजबूरी नहीं थी लेकिन वे अपने सपनों को जीना चाहती थीं और यही वजह है कि आज वे अपनी मुस्कान और अपने काम दोनों से अनगिनत लोगों को प्रेरणा दे रही हैं।
पति की क्लासेस को देखकर आया आइडिया
यह 2019 की बात है, कोरोना के आने के ठीक पहले। अपने पूरे घर को संभालते हुए, सबका ख्याल रखते हुए ऊषा श्रीवास्तव जिम्मेदारियों से थोड़ी निवृत्त हो गई थीं। बच्चों के अपने परिवार थे और पति एस के श्रीवास्तव, भोपाल (भेल) से काफी समय पहले रिटायर हो चुके थे। रिटायरमेंट के बाद भी श्रीवास्तव जी नियमित इंडस्ट्री के इंजीनियर व इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन कोर्स का संचालन कर रहे थे।
ऊषा श्रीवास्तव उनके इस रूटीन को रोज देखतीं और अचानक एक दिन ऊषा जी को खयाल आया कि वे भी तो अपनी पाककला को इस तरह उन लोगों तक पहुंचा सकती हैं जो हेल्दी खाने में विश्वास रखते हैं। बस यहीं से बीज पड़ा 'मम्मीजी की रसोई' का। उन्होंने मन में निश्चय किया और अपने ऑनलाइन फ़ूड बिजनेस की नींव डाल दी।
उन्होंने खासतौर पर उन लोगों के लिए नाश्ता और खाद्य सामग्री तैयार करनी शुरू की जो लाइफस्टाइल डिसीजेस यानी जीवनशैली जनित बीमारियों जैसे डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, उच्च रक्तचाप, मोटापा आदि से ग्रसित थे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी महसूस किया कि तेज रफ्तार जिंदगी में कामकाजी महिलाओं और उनके बच्चों के लिए भी हेल्दी फ़ूड का रोज उपलब्ध होना मुश्किल हो जाता है।
बस उन्होंने तय कर लिया कि ये कमी पूरी करने में वे मदद का हाथ बढ़ाएंगी और हौसला बढ़ाने में उनकी मदद की उनके पति ने। आज उनके ऑनलाइन फ़ूड व्यवसाय से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं और शहर के बाहर भी उनके हाथ के बनाये स्नैक्स मंगवाए जाते हैं।
माँ के हाथ का स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता
उनके द्वारा उपलब्ध नाश्ते और खाद्य में सबसे अधिक पसंद किये जाते हैं ओट्स के हाई प्रोटीन लड्डू, खजूर और मूंगफली दाने के एनर्जी रोल, पंजीरी मेवा लड्डू, गुड़-सौंठ के जचकी वाले लड्डू, ड्रायफ्रूट लड्डू, एनर्जी बार और ओट्स व नट्स का ऑइल फ्री नमकीन। ये सभी चीजें हर उम्र और महिला-पुरुषों के लिए होती हैं।
काम के शुरू होने के कुछ ही समय में उनके हाथ के बनाये स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजनों की चर्चा इस तेजी से होने लगी कि उन्हें किटी पार्टियों, गेदरिंग्स, दफ्तर की मीटिंग्स आदि के लिए भी ऑर्डर मिलने लगे। आज आलम यह है कि त्योहारों के दिनों में ऑर्डर इतने ज्यादा हो जाते हैं कि ऊषा जी रात रात भर जागकर अपने स्टाफ के साथ ऑर्डर पूरे करती हैं। इस दौरान 72 साल की उम्र में भी वे भाग भागकर ऑर्डर तैयार करती हैं। वे कहती हैं जब लोग मेरे हाथ की बनी चीज खाकर कहते हैं कि ये उनको उनकी माँ के हाथ के खाने की या घर की याद दिलाती है तो उनको खिलाने का मेरा उत्साह चौगुना हो जाता है।
ऑनलाइन ऑर्डर लेने और पेमेंट आदि का हिसाब रखने के लिए टेक सेवी होना भी जरूरी था। तो ऊषा जी ने 71 साल की उम्र में अपने नाती-पोतों से मोबाइल पर सारी चीजें सीखीं और आज वे इतनी महारत से ये सारे काम कर लेती हैं कि नौजवान भी देखते रह जाएँ। उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी में मौजूद बच्चों के लिए वो सुपर ग्रैंडमा हैं जो हर काम कर सकती हैं। उनका काम नई पीढ़ी को भी प्रेरणा देता है। जिस तरह से उनमे सीखने और आगे बढ़ने का जूनून है वो इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि 'उम्र तो महज एक नंबर है।'

कमेंट
कमेंट X