Breast Cancer Survivor: ब्रेस्ट कैंसर से मां को खोया, फिर खुद किया सामना, ऐसी है रुचिका बघड़िया की कहानी
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आज यानी 4 फरवरी 2023 को विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की समस्या काफी बढ़ रही है। भारत में भी इस बीमारी का प्रसार तेजी से हो रहा है। हर साल लाखों महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो रही हैं, जिसकी वजह से उनकी जान तक चली जाती है। लेकिन अधिकतर महिलाओं को इस बात की जानकारी नहीं है कि अगर समय रहते ब्रेस्ट कैंसर का इलाज हो जाए तो बीमारी से बचा जा सकता है। आज हम एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की वजह से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस बीमारी की वजह से अपनी मां को खोने के बाद ये महिला भी ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ गई। लेकिन बीमारी का डटकर सामना करते हुए उन्होंने जीत हासिल की और अब हर महिला को इस बारे में जागरूक करने का काम कर रहीं हैं ताकि उनकी तरह कोई अपनी मां, बहन, बेटी को न खोए। कैंसर दिवस पर जानें ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर रुचिका बघड़िया की कहानी।
कौन हैं रुचिका बघड़िया
रुचिका बघड़िया ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर हैं। रुचिका ने समय रहते ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराया और आज वह एकदम स्वस्थ हैं। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुए लगभग पांच साल हो गए हैं। हालांकि इस बीमारी की वजह से उन्हें काफी कुछ खोना भी पड़ा। लेकिन रुचिका ने हार नहीं मानी। ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता न होने की वजह से किसी और महिला को उनके जैसी परेशानी न हो, इसके लिए रुचिका अपने अनुभवों के जरिए महिलाओं को इस बीमारी के प्रति जागरूक कर रहीं हैं और ब्रेस्ट कैंसर मरीजों का हौसला बढ़ाने का काम कर रही हैं।
ब्रेस्ट कैंसर से खोया मां को
दरअसल, रुचिका की मां को ब्रेस्ट कैंसर था। साल 2012 में झारखंड में रहने के दौरान उनकी मां को अचानक ब्रेस्ट में परेशानी होने लगी। जून में पता चला कि रुचिका की मां की ब्रेस्ट में एक गांठ जैसा कुछ है। अस्पताल में जांच कराई तो ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। उस समय न तो रुचिका और न उनकी मां को ब्रेस्ट कैंसर जैसी किसी बीमारी के बारे में पता था। रुचिका ने मां का इलाज शुरू कराया। उनकी सर्जरी हुई। फिर कीमो दी गई लेकिन किसी मेडिकल कॉम्प्लिकेशन की वजह से कैंसर उनके ब्रेन तक पहुंच गया। मां को बचाना मुश्किल हो गया और 10 महीने चले इलाज के बाद साल 2013 में रुचिका की मां का ब्रेस्ट कैंसर की वजह से निधन हो गया।
रुचिका को हुआ जेनेटिक ब्रेस्ट कैंसर
मां के बाद रुचिका भी इस बीमारी की चपेट में आ गई। रुचिका मां के निधन के बाद इतना डर गईं कि अक्सर खुद ही अपने स्तनों की जांच करती रहती थीं कि कोई गांठ तो नहीं है। हालांकि जिस बात का डर था, वही हुआ। साल 2016 में रुचिका को ब्रेस्ट में गांठ जैसी महसूस हुई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच करवाई। रुचिका दिल्ली के अपोलो अस्पताल पहुंची, जहां उन्हें खुद के ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित होने का पता चला।
रुचिका ने डॉक्टर को बताया कि उनकी मां भी इस बीमारी से पीड़ित थीं, इस पर अस्पताल में ब्रेस्ट कैंसर की आनुवंशिकता की जांच कराई गई। रिपोर्ट में पाया गया कि रुचिका को जेनेटिक बीमारी हुई है। उनके लिए यह किसी झटके से कम नहीं था लेकिन मां का इलाज कराने के दौरान रुचिका ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूक हो चुकीं थीं। इसलिए उन्हें इलाज की प्रक्रिया को लेकर पहले से काफी कुछ पता था।
ब्रेस्ट कैंसर से कैसे जीती जंग
रुचिका के एक ब्रेस्ट में कैंसर था लेकिन वंशानुगत बीमारी होने के कारण दूसरी ब्रेस्ट में भी कैंसर होने का खतरा था। इसलिए इलाज के दौरान रुचिका के दोनों ब्रेस्ट निकालने पड़े। पहले कैंसर वाले ब्रेस्ट की सर्जरी करके उसे निकाला गया और कुछ महीनों बाद दूसरी ब्रेस्ट भी निकाल दी गई। इतने में रुचिका का इलाज नहीं रुका। रुचिका को कई और सर्जरी का भी सामना करना पड़ा। रिप्रोडक्टिव ऑर्गन में बीमारी आने के खतरे का अंदेशा होने पर एहतियातन उनके बच्चेदानी को भी सर्जरी के बाद निकाल दिया गया।
ब्रेस्ट कैंसर मरीजों को कर रहीं जागरूक
रुचिका जानती हैं कि महिलाओं के लिए यह बीमारी शारीरिक और मानसिक तौर पर कितनी घातक हो सकती है। इसलिए रुचिका अब ब्रेस्ट कैंसर पीड़ितों को प्रेरित करती हैं कि वह हिम्मत से इस बीमारी से लड़े। रुचिका ब्रेस्ट कैंसर पीड़ितों से मिलती हैं और बीमारी के बारे में जागरूक करती हैं। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी रुचिका ब्रेस्ट कैंसर को लेकर संबोधित कर चुकी हैं।

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