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15 अगस्त को दिया जाने वाला वीरता पुरस्कार 'परमवीर चक्र', एक स्विस महिला ने किया था इसके मेडल को डिजाइन

Sun, 16 Aug 2020 09:38 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sun, 16 Aug 2020 09:38 AM IST
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bravery award paramveer chakra medal designed by a swiss woman eva
savitri khanolkar - फोटो : social media

15 अगस्त पर परमवीर चक्र पुरस्कार दिया जाता है। इस पुरस्कार को देने की शुरूआत 15 अगस्त 1947 से की गई थी। लेकिन इस पुरस्कार स्वरूप दिए जाने वाले मेडल को डिजाइन एक स्विस महिला ने किया था। जिसे भारतीय संस्कृति से इतना प्यार हो गया कि वो भारत में ही रच-बस गईं। यहीं नहीं उन्होंने एक भारतीय से प्यार और फिर शादी भी की। इस स्विस महिला का नाम है इवा, जो शादी के बाद सावित्री बाई खानोलकर कहलाईं।

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स्विट्जरलैंड में पैदा हुईं और पली-बढ़ीं इवा के पिता आंद्रे डी मैडे हंगरी के रहने वाले थे और मां मार्टें हेंट्जेल एक रूसी महिला थीं। इवा के पिता यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्य करते थे। वहीं उनकी मां भी पढाती थीं। हालांकि मां के निधन के बाद उनकी परवरिश पिता ने ही की। मां के गुजर जाने के बाद पिता की लाइब्रेरी में समय बिताने वाली इवा को किताबों में रूचि हो गई। यहीं से उन्होंने भारत की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी किताबों को पढ़ा और उनका रुझान इस ओर हो गया।

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1929 में इवा की मुलाकात विक्रम रामजी खानोलकर से हुई। विक्रम इंडियन आर्मी कैडेट के सदस्य थे। वे ब्रिटेन के रॉयल मिलट्री एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए गए थे। इवा रामजी से शादी करना चाहती थीं लेकिन उनके पिता इस बात के लिए तैयार नही थे। लेकिन इवा ने 1932 में भारत आकर रामजी से शादी कर ली और इवा से सावित्री बाई खानोलकर बन गईं। इवा के भारतीय संस्कृति के लगाव और लगन की देन थी कि जल्दी ही उन्होने हिंदी, मराठी और संस्कृत बोलना सीख लिया। भारत के प्राचीन इतिहास की गहन जानकारी के कारण इस मेडल की डिजाइन का प्रस्ताव सावित्री बाई को मिला। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। सावित्री ने महावीर चक्र, वीर चक्र और अशोक चक्र की डिजाइन भी तैयार की थी। 

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