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पति की शहादत के बाद सैनिक बन कर रहीं देश की सेवा, ऐसी ही कुछ साहसी महिलाओं की कहानी

Fri, 27 Dec 2019 11:00 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Fri, 27 Dec 2019 11:00 AM IST
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brave stories of martyr's wife

पति की शहादत के बाद भी उस महिला के हौसलों में कमी नहीं आई। इसलिए खुद सैनिक बनकर देश सेवा के साथ ही परिवार का पालन-पोषण भी कर रही हैं। ये कहानी केवल एक साहसी महिला की नहीं है बल्कि शशि के जैसी और भी महिलाएं हैं जिन्होंने पति की शहादत के बाद घर-परिवार को संभालने का बीड़ा उठा रखा है।

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brave stories of martyr's wife

राया के गांव नगला भीम निवासी मुकेश चंद्र शर्मा बीएसएफ में थे। 19 दिसंबर 2009 को जम्मू के बारामुला में हुए आतंकी हमले में वो शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद पत्नी शशिदेवी पर जिम्मेदारी आ गई थी। शशिदेवी ने भी कुछ दिन बाद बीएसएफ ज्वाइन कर ली। मौजूदा समय में उनकी पोस्टिंग पंजाब में है। वो दस साल के बेटे आर्यन का भी लालन पालन कर रही हैं। शशिदेवी का कहना है कि वो अपने बेटे को भी सेना में ही भेजेंगी। इसके लिए अभी से उसे तैयार कर रही हैं। शशि का कहना है कि पति के शहीद होने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां आईं। लेकिन उन्होंने सबका सामना किया। 


 
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brave stories of martyr's wife
शहीद पुष्पेन्द्र की मॉ महावीरी देवी व पिता तेज सिंह

ऐसी ही एक कहानी है सौंख क्षेत्र के गांव नगला खुटियां की। जहां के निवासी पुष्पेंद्र सिंह आर्मी में थे। उनकी तैनाती श्रीनगर के तंगधार सेक्टर में थी। 13 अगस्त 2018 को आतंकियों से लड़ते हुए पुष्पेंद्र शहीद हो गए थे। बताया जाता है कि मुठभेड़ में जांबाज पुष्पेंद्र ने आतंकियों को भी ढेर कर दिया था। पुष्पेंद्र की मां महावीरी देवी और पत्नी सुधा सिंह शहीद पुष्पेंद्र के सपने को पूरा करने का संकल्प लिए हैं। सुधा सिंह का कहना है कि उनके पति चाहते थे कि बेटा भी सेना में जाए। वो बेटे सिद्धार्थ को सेना में अफसर बनाएंगी। वह भी चाहती हैं कि उनका बेटा बड़ा होकर देश की सेवा करे। हमारे देश की सीमाओं का रखवाला बने। 


 
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छाता के गांव लाडपुर निवासी विक्रम सिंह 27 मार्च 2018 को कश्मीर में शहीद हो गए थे। शहीद विक्रम सिंह के दो बेटे हैं। शहीद की पत्नी रचना का कहना है कि वह अपने दोनों बेटों को फौजी बनाएंगी। विक्रम सिंह भी यही चाहते थे कि उनके बच्चे भी देश की सेवा करें। रचना दोनों बच्चों का बखूबी पालन कर रही हैं। इनके अलावा जिले में कई वीर नारियां है, जो अपने पति की शहादत के बाद बच्चों को पालन पोषण कर रही हैं और उन्हें सेना में भेजने की तैयारी करा रही हैं।

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