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Teachers Day 2021: अनीता शर्मा की इस पहल से दृष्टिबाधित बच्चों के लिए भी शिक्षा प्राप्त करना हुआ आसान
Sun, 05 Sep 2021 01:08 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:08 PM IST
सार
- दृष्टिबाधित बच्चों को ऑडियो के माध्यम से कर रही हैं शिक्षित
- 'वॉइस ऑफ ब्लाइंड' नाम की एनजीओ का मिल रहा है सहयोग
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दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा के लिए अनोखी पहल (सांकेतिक)
- फोटो : istock
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विस्तार
शिक्षा हर बच्चे का मूल अधिकार है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश के इंदौर की अनीता शर्मा ने दिव्यांग बच्चों को अनोखे ढंग से पढ़ाने का जिम्मा उठाया है। दिव्यांग बच्चों को पढ़ाना और चीजों को बेहतर ढंग से सिखा पाना, आम बच्चों के मुकाबले कठिन होता है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए अनीता ने अनोखी पहल की है। दिव्यांग और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए आवश्यक शिक्षण मटैरियल वह ऑडियो के रूप में उपलब्ध करा रही हैं। इससे चीजों को सीखना बच्चों के लिए काफी आसान हो गया है। सोशल मीडिया के इस युग में यह काम और तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों को शिक्षित करने के लिए की गई अनीता के इस पहल की सभी लोग तारीफ कर रहे हैं।
दृष्टिबाधित बच्चों को मिली नई उम्मीद
अनीता कहतीं हैं, साल 2011 से मैं इस तरह से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही हूं। दिव्यांग और दृष्टिबाधित बच्चों को उनकी पढ़ाई की चीजें ऑडियो के रूप में उपलब्ध कराने से उनके लिए विषय को सीखना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो गया है। मेरी इस कोशिश में समय के साथ लोग शामिल होते गए। अब तक इस तरह की शिक्षा प्राप्त कर चुके 500 से अधिक बच्चों को नौकरी मिल चुकी है। शुरुआत में यह काम काफी कठिन था हालांकि जब से सोशल मीडिया का चलन बढ़ गया है तब से यह का अपेक्षाकृत आसान हो गया है।
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दृष्टिबाधित बच्चों को मिली नई उम्मीद
अनीता कहतीं हैं, साल 2011 से मैं इस तरह से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही हूं। दिव्यांग और दृष्टिबाधित बच्चों को उनकी पढ़ाई की चीजें ऑडियो के रूप में उपलब्ध कराने से उनके लिए विषय को सीखना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो गया है। मेरी इस कोशिश में समय के साथ लोग शामिल होते गए। अब तक इस तरह की शिक्षा प्राप्त कर चुके 500 से अधिक बच्चों को नौकरी मिल चुकी है। शुरुआत में यह काम काफी कठिन था हालांकि जब से सोशल मीडिया का चलन बढ़ गया है तब से यह का अपेक्षाकृत आसान हो गया है।
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शिक्षा की अनोखी पहल (सांकेतिक)
- फोटो : Pixels
एनजीओ का मिला सहयोग
अनीता शर्मा की इस कोशिश में 'वॉइस ऑफ ब्लाइंड' नाम की एनजीओ का भी सहयोग मिल रहा है। यहां से वह पढ़ाई की सामग्री रिकॉर्ड करके बच्चों को भेज देती हैं। लोगों को उनकी यह पहल काफी पसंद आई और देश के तमाम हिस्सों से भी स्थानीय भाषा में शिक्षण सामग्रियों की मांग बढ़ने लगी। अनीता, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी वॉइस ऑफ ब्लाइंड के माध्यम से भी बच्चों को लिए पठन-पाठन की सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। अनीता कहतीं हैं, जो बच्चे देख नहीं सकते, किताबें नहीं पढ़ सकते हैं, ऐसे बच्चों के लिए यह तरीका काफी काम आ रहा है। हर बच्चे को शिक्षा प्राप्त हो सके यही मेरा लक्ष्य है और इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही हूं।
अनीता शर्मा की इस कोशिश में 'वॉइस ऑफ ब्लाइंड' नाम की एनजीओ का भी सहयोग मिल रहा है। यहां से वह पढ़ाई की सामग्री रिकॉर्ड करके बच्चों को भेज देती हैं। लोगों को उनकी यह पहल काफी पसंद आई और देश के तमाम हिस्सों से भी स्थानीय भाषा में शिक्षण सामग्रियों की मांग बढ़ने लगी। अनीता, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी वॉइस ऑफ ब्लाइंड के माध्यम से भी बच्चों को लिए पठन-पाठन की सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। अनीता कहतीं हैं, जो बच्चे देख नहीं सकते, किताबें नहीं पढ़ सकते हैं, ऐसे बच्चों के लिए यह तरीका काफी काम आ रहा है। हर बच्चे को शिक्षा प्राप्त हो सके यही मेरा लक्ष्य है और इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही हूं।

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