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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Ram Mandir Pran Pratishtha Shri Ram and Ravana were worshiped together for first time in Bisrakh Greater Noida

Ram Mandir: पहली बार यहां हुई श्रीराम और रावण की एक साथ पूजा, लंकापति के मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा

Tue, 23 Jan 2024 12:37 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 23 Jan 2024 12:37 PM IST
सार

ग्रेटर नोएडा के बिसरख में पहली बार श्रीराम और रावण की एक साथ पूजा हुई। लंकापति के मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई। बिसरख के शिवमंदिर और रावण मंदिर में जय श्री राम के जयकारे गूंजे। बिसरख गांव का नाम रावण के पिता विश्रवा पंडित के नाम पर पड़ा था। लोगों की ऐसी मान्यता है।

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Ram Mandir Pran Pratishtha Shri Ram and Ravana were worshiped together for first time in Bisrakh Greater Noida
Ram Mandir Pran - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो सोमवार को ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख स्थित शिव मंदिर में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा की गई। रावण की जन्मस्थली कहे जाने वाले बिसरख के प्राचीन शिव मंदिर में पहली बार भगवान श्रीराम परिवार के साथ विराजमान हो गए। 
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अब तक इस शिवमंदिर में शिवलिंग ही था और इसे लोग रावण मंदिर के नाम से जानते थे। इस दौरान गांव का माहौल पूरी तय राममय था और बच्चों, महिलाओं व लोगों की जुबान पर राम नाम रहा। वहीं, कुछ साल पहले ही शिव मंदिर के पास ही रावण मंदिर का भी निर्माण कराया गया है। जिसमें रावण की प्रतिमा स्थापना की गई है।
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मंदिर परिसर में सुबह से ही जय श्रीराम के जयकारों की गूंज के बीच भक्तों ने राममूर्ति स्थापना से पहले गांव के सभी गलियारों से शोभायात्रा निकाली गई। डीजे बज रहे भजनों पर युवा और महिलाएं भी थिरकने से रोक न सकीं। बच्चों, महिलाओं व युवाओं ने हाथों में भगवा झंडा लिए जय श्री राम के जयघोष से वातावरण को राममय बना दिया। 
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लोगों ने घरों के ऊपर से रामभक्तों की भीड़ पर फूल बरसाएं। अयोध्या में रामलाला की मूर्ति की स्थापना के दौरान ही मंदिर परिसर में श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्ति स्थापित की गई। राम परिवार की स्थापना के बाद प्रसाद का वितरित किया गया। इस अवसर पर आसपास की सोसायटियों से भी रामभक्त प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में शामिल हुए।

प्राचीन शिवमंदिर की दीवार पर बनी हैं रावण की प्रतिमा

बिसरख गांव में प्राचीन शिव मंदिर की बाहरी दीवारों पर सीमेंट से रावण व उनके परिवार की बड़ी प्रतिमाएं भी बनी हैं। मंदिर के अंदर प्राचीन शिवलिंग हैं जो बाहर से ही दिखाई देता है। दूर से दूर से लोग आज भी इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं।

शिव मंदिर में शिवलिंग का नहीं पाया कोई आकार, चंद्रा स्वामी ने कराई थी खुदाई

ग्रामीण बताते हैं कि जब विश्रवा पंडित के द्वारा शिवलिंग स्थापित करने की बात राजनेता चंद्रा स्वामी के समक्ष आई तो वह पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ पहुंचे और शिवलिंग की खुदाई कराई। मगर करीब 100 फीट खुदाई करने के बाद भी कोई ओर-छोर नहीं मिला था। थक-हारकर खुदाई बंद कर गी गई थी।

यह है मान्यता...
बिसरख गांव के लोगों का मानना है किर रावण का नाता बिसरख गांव से माना जाता है। रावण के पिता ऋषि विश्रवा की बिसरख तपोस्थली हुआ करती थी। रावण के जन्म के लिए उन्होंने इसी जगह पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी। रावण के जन्म के बाद वह भी यहां आकर पूजा-अर्चना करते थे।

इसलिए बोलचाल की भाषा में लोग अकसर इस मंदिर को रावण का मंदिर भी कह देते थे। मान्यता तो यह भी है कि बिसरख गांव का नाम भी रावण के पिता विश्रवा पंडित के नाम पर रखा गया था। जिस वजह से लंबे समय तक इस गांव में दशहरा नहीं मनाया गया। हालांकि ग्रामीणों ने कुछ साल पहले गांव में दशहरा मनाना भी शुरू कर दिया है।

शिव मंदिर में श्रीराम परिवार की स्थापना की गई है। इस मंदिर में जो शिवलिंग है उस पर रावण और उनसे पहले रावण के पिता विश्रवा पंडित ने भी पूजा-अर्चना की थी। -रामदाय महाराज, महंत शिवमंदिर बिसरख।
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