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राम मंदिर के संघर्ष की कहानी: दो गोली लगने के बावजूद जय श्रीराम का उद्घोष करते आगे बढ़े थे आद्या सिंह

Mon, 22 Jan 2024 01:31 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 22 Jan 2024 01:31 PM IST
सार

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो गई है। 500 वर्षों से अधिक का इंतजार खत्म हो गया है। रामलला राम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हो गए हैं।

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Despite being shot twice Aadya Singh went ahead chanting Jai Shri Ram
आद्या सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बात वर्ष 1990 की है। कारसेवकों का समूह अयोध्या पहुंच गया था। बांसगांव क्षेत्र के भुसवल निवासी आद्या सिंह दो गोली लगने के बावजूद जयश्रीराम का जयघोष करते आगे बढ़े थे। आद्या सिंह भी कई दिन भूखे-प्यासे नदी के किनारे कभी साइकिल तो कभी पैदल चलते-चलते सरयू पार कर वहां पहुंचे थे। दूसरे दिन हरियाणा और पंजाब के कारसेवकों संग आगे बढ़ रहे थे, तब तक एक गोली आगे चल रहे युवक को लगी और वहीं गिर पड़ा।

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युवक को उठाने झुके आद्या सिंह को भी दो गोली लगी और बेहोश हो गए। होश आया तो अस्पताल में थे। सोमवार को श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर इन्हें नांगलिया अस्पताल में सम्मानित किया जाएगा। शहर के अंधियारी बाग मोहल्ले में रहने वाले आद्या सिंह आदर्श इंटर कॉलेज हरदी चक में गणित और विज्ञान पढ़ाते थे।
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अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए आंदोलन शुरू हुआ तो इनके गांव भुसवल में हर दिन हरिकीर्तन होने लगा। गांव में अखंड श्रीराम ज्योति जलाई गई थी। उस वर्ष दिवाली के दिये भी इसी श्रीराम ज्योति से जलाए गए थे। अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ तो इनके समेत गांव के 18 लोग साइकिल से अयोध्या के लिए निकल पड़े।
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डॉ प्रदीप राव। - फोटो : अमर उजाला।

भावुक पल होगा...जब एक शिष्य अपने गुरु की अंतिम इच्छा पूरी करेगा
कुलसचिव महायोगी गुरु डॉ प्रदीप राव ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की अंतिम इच्छा थी कि रामजन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर बने। उनके बहुत सारे साधु शिष्य 22 जनवरी को गोरखनाथ मंदिर में अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखेंगे। यह बहुत ही भावुक पल होगा। यह दिन इस वजह से भी खास होगा कि एक शिष्य के तौर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ की अंतिम इच्छा को पूरा करने जा रहे हैं।

गोरखनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजन महंत अवेद्यनाथ को ही समर्पित होकर किए जा रहे हैं। वैसे तो राम मंदिर आंदोलन हर जगह चल रहा था। हर जगह परिवार के साथ लोग समर्पित थे। लेकिन, गोरखपुर के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो गोरखनाथ मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर, सरस्वती शुिश मंदिर, गीता वाटिका आदि केंद्र थे, जहां से आंदोलन को मजबूती मिली। इन सभी जगहों के लिए सोमवार का पल ऐतिहासिक व यादगार होगा। सभी को इस पल का बेसब्री से इंतजार है।

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सांसद कमलेश पासवान। - फोटो : X@Kamlesh Paswan

पिता का सपना साकार होता देख मन है आह्लादित : कमलेश पासवान
बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान के पिता ओमप्रकाश पासवान वर्ष 1990 में हिंदू महासभा के टिकट पर मानीराम से विधायक थे। अयोध्या में कारसेवा के लिए जाते समय उनको गिरफ्तार कर लिया गया। वह आजगमढ़ की जेल में एक महीने तक रहे। गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ उन्हें अपना हनुमान कहते थे। इसलिए वह रामजन्म भूमि आंदोलन में उनके साथ जी जान से लगे रहे। वर्ष 1992 की कारसेवा में कमलेश छात्र थे लेकिन पिता के साथ वह अयोध्या गए थे।

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वह कहते हैं पिताजी तो नहीं रहे, लेकिन उनका सपना आज साकार हो रहा है। राममंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पासवान परिवार ही नहीं हर तबका खुश है। सांसद बताते हैं, 1990 में पिता ओमप्रकाश घर से -अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ निकले तो कहे थे वह राम काज अयोध्या जा रहे हैं, लेकिन नौसड़ में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। 1992 में जब अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ तो उस समय कल्याण सिंह की सरकार थी। बड़े महराज अयोध्या में जमे हुए थे।

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