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Ayodhya Ram Mandir: भामाशाह बन गए थे गोरक्षनगरी के व्यापारी, खोल दिया था खजाना

Mon, 22 Jan 2024 12:48 PM IST
vivek shukla उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर।
उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 22 Jan 2024 12:48 PM IST
सार

चेंबर ऑफ इंड्रस्टी के तत्कालीन सचिव एसके अग्रवाल बताते हैं, बात वर्ष 1990 की है। अयोध्या में कारसेवा की घोषणा से पहले ही पूरा पूर्वांचल जय श्रीराम के उदघोष से गूंज रहा था। भाजपा नेता रमापति राम त्रिपाठी और शिव प्रताप शुक्ल की अगुवाई में गांव- मोहल्ले से कारसेवक निकलने लगे थे।

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Bhamashah become businessman of Gorakshanagari opened treasury
एसके अग्रवाल और बालकृष्णा सराफ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

देश की रक्षा के लिए भामाशाह ने महाराणा प्रताप के सामने अपनी धन की गठरी खोल दी थी। उसी प्रकार राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों के लिए गोरखपुर के उद्योगपतियों ने भी खजाना खोल दिया था। धर्म की रक्षा के लिए भामाशाह यहां के व्यापारी बन गए थे।

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यहां तक कि जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा पर रोक लगी थी तो बिहार के बार्डर वाले जिलों में खाद्यान्न संकट गहरा गया था। उस दौरान इन उद्यमियों ने कारसेवकों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया और तमकुहीराज (कुशीनगर) बार्डर पहुंचकर भोजन एवं अन्य सामग्री की व्यवस्था की।
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गोरखपुर के कारसेवक आद्या प्रसाद सिंह को गोली लगी तो उनका गोरखपुर के डॉक्टरों ने निशुल्क इलाज किया था। ये उद्यमी अपने इन कार्यों का श्रेय लेना भी नहीं चाहते।
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इसे भी पढ़ें: गोरखपुर विश्वविद्यालय में 'अयोध्या अध्ययन केंद्र' की होगी स्थापना

चेंबर ऑफ इंड्रस्टी के तत्कालीन सचिव एसके अग्रवाल बताते हैं, बात वर्ष 1990 की है। अयोध्या में कारसेवा की घोषणा से पहले ही पूरा पूर्वांचल जय श्रीराम के उदघोष से गूंज रहा था। भाजपा नेता रमापति राम त्रिपाठी और शिव प्रताप शुक्ल की अगुवाई में गांव- मोहल्ले से कारसेवक निकलने लगे थे।

इसे भी पढ़ें: रामनगरी की तरह सजी गोरक्षनगरी भी, आज घर-घर मनेगी दिवाली

उधर, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी रथ यात्रा लेकर निकल पड़े थे। आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने जगह-जगह घेराबंदी शुरू कर दी। अघोषित कर्फ्यू के चलते अनाज का संकट होने लगा। ऐसे में जो कारसेवक टुकड़ी-टुकड़ी में अयोध्या जा रहे तो थे, उनके रुकने व भोजन का प्रबंध ने बड़ी चुनौती थी।

आंदोलनकारियों का केंद्र गोरखनाथ मंदिर हुआ करता था। महंत अवेद्यनाथ के आह्वान पर व्यापार मंडल के नेता न दयाशंकर दुबे, चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के चंद्रप्रकाश अग्रवाल, व्यापारी नेता विष्णु अजीत सरिया, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी कृष्ण कुमार तुलस्यान और विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष बाल कृष्ण सर्राफ ने आंदोलन में सक्रिय योगदान शुरू कर दिया।
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