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बैराज से मुक्तेश्वरधाम को खतरा
पठानकोट।
Updated Mon, 21 Jul 2014 10:56 PM IST
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गांव डूंग स्थित प्राचीन मुक्तेश्वर मंदिर को शाहपुरकंडी बैराज प्रोजेक्ट से खतरा है। महाभारत कालीन ऐतिहासिक महत्व से जुड़े इस मंदिर के अस्तित्व पर संकट को देखते हुए मंदिर कमेटी आगे आई है। कमेटी की ओर से मंदिर बचाने की मांग उठाई जा रही है। पदाधिकारियों का कहना है कि शाहपुरकंडी बैराज प्रोजेक्ट से मंदिर के डूबने का खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि बैराज प्रोजेक्ट के नक्शे में मंदिर की साइट को डैम में दिखाया गया है।
मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि 5500 साल पुराने इस मंदिर को बचाने के लिए मंदिर कमेटी लंबे समय से संघर्ष कर रही है, लेकिन शासन-प्रशासन दोनों का अभी तक कोई पॉजिटिव रिस्पांस नहीं मिला। हालांकि प्रशासन इस मंदिर को बचाने के लिए नक्शे में कुछ परिवर्तन लाने की बात करना है। फिर भी प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई भरोसेमंद बात नहीं की गई है।
मंदिर कमेटी ने महाभारतकालीन गुफाओं और शिव मंदिर को बचाने के लिए राजस्व विभाग के सचिव, मुख्यमंत्री पंजाब, पुरात्तव विभाग सहित केंद्र सरकार को भी पत्र लिखा है। उनकी मांग है कि गुफाओं के पास दीवार बनाकर मंदिर को सेफ किया जाए। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, महासचिव भीम सिंह, डा. मनोज पराशर, ठाकुर गुलजार सिंह, नरेश कुमार और नवीन अग्रवाल को इस बात का मलाल है कि बांध प्रशासन मंदिर को बचाने के प्रति गंभीर नहीं है।
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पांडवों ने यहां बिताए थे 6 महीने
मान्यता है कि महाभारत काल में 12 साल के अज्ञातवास के दौरान मुक्तेश्वर मंदिर वाले स्थान पर छह महीने बिताए थे। इस दौरान उन्होंने यहां गुफाओं का निर्माण कर शिवलिंग की स्थापित की थी। उस काल की रसोई और बाथरूम के प्रमाण आज भी यहां मौजूद हैं। मंदिर के पुजारी पवन कुमार कहते हैं कि इस स्थान का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां पर अमावस्या, नवरात्र, बैसाखी और शिवरात्रि पर मेले का भी आयोजन होता है। क्षेत्र के लोगों बीच इस स्थान को छोटा हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है।
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मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि 5500 साल पुराने इस मंदिर को बचाने के लिए मंदिर कमेटी लंबे समय से संघर्ष कर रही है, लेकिन शासन-प्रशासन दोनों का अभी तक कोई पॉजिटिव रिस्पांस नहीं मिला। हालांकि प्रशासन इस मंदिर को बचाने के लिए नक्शे में कुछ परिवर्तन लाने की बात करना है। फिर भी प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई भरोसेमंद बात नहीं की गई है।
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मंदिर कमेटी ने महाभारतकालीन गुफाओं और शिव मंदिर को बचाने के लिए राजस्व विभाग के सचिव, मुख्यमंत्री पंजाब, पुरात्तव विभाग सहित केंद्र सरकार को भी पत्र लिखा है। उनकी मांग है कि गुफाओं के पास दीवार बनाकर मंदिर को सेफ किया जाए। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, महासचिव भीम सिंह, डा. मनोज पराशर, ठाकुर गुलजार सिंह, नरेश कुमार और नवीन अग्रवाल को इस बात का मलाल है कि बांध प्रशासन मंदिर को बचाने के प्रति गंभीर नहीं है।
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पांडवों ने यहां बिताए थे 6 महीने
मान्यता है कि महाभारत काल में 12 साल के अज्ञातवास के दौरान मुक्तेश्वर मंदिर वाले स्थान पर छह महीने बिताए थे। इस दौरान उन्होंने यहां गुफाओं का निर्माण कर शिवलिंग की स्थापित की थी। उस काल की रसोई और बाथरूम के प्रमाण आज भी यहां मौजूद हैं। मंदिर के पुजारी पवन कुमार कहते हैं कि इस स्थान का वर्णन स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां पर अमावस्या, नवरात्र, बैसाखी और शिवरात्रि पर मेले का भी आयोजन होता है। क्षेत्र के लोगों बीच इस स्थान को छोटा हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है।