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पारे के साथ चढ़े दूध के दाम
गुरदासपुर ।
Updated Sun, 25 May 2014 10:37 PM IST
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गर्मी के मौसम में तपिश बढ़ने के साथ ही दूध सरीखे खाद्य सामग्रियों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों के दूध उत्पादकों ने दूध की कीमत बढ़ा दी है। अब वे चालीस रुपये से पचास रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेच रहे हैं।
हालांकि इससे पूर्व उनकी ओर से पैंतीस रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेचा जा रहा था। दूध उत्पादकों का कहना है कि तपिश बढ़ने के कारण मवेशियों के दूध देने की मात्रा में भी कमी आई है। यही वजह है कि उत्पादकता में कमी के कारण उन्हें मजबूरन कीमतों में इजाफा करना पड़ा है।
मौसम की मार का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि दिन के समय तीखी धूप के कारण इन दिनों लोगों को घर से निकलने के लिए भी हिम्मत जुटानी पड़ रही है। दूसरी तरफ गर्मी के चलते दूध की आपूर्ति में कमी दर्ज की गई है। ऐसे में विक्रेताओं ने इस कमी को देखते हुए दूध के दाम तो बढ़ा दिया है। वहीं कुछ उत्पादकों द्वारा दूध की क्वालिटी भी गिरा दी गई है।
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शहरी क्षेत्र के घरों व मिठाई की दुकानों के अलावा होटलों और ढाबों पर प्रयोग होने वाला दूध ग्रामीण क्षेत्रों से ही आता है। दूसरी ओर गुज्जर समुदाय के लोग भी गर्मियों में अपने मवेशियों के साथ वापस पहाड़ों में चले जाते हैं। दूसरी ओर गर्मी के कारण दुधारू मवेशियों में दूध देने की मात्रा में भी गिरावट होती है।
माना जा रहा है कि दूध की आपूर्ति में कमी के कारण दूध में मिलावट की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। मिलावटखोर सिंथेटिक दूध के जरिए मौके का फायदा उठा सकते हैं।
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हालांकि इससे पूर्व उनकी ओर से पैंतीस रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेचा जा रहा था। दूध उत्पादकों का कहना है कि तपिश बढ़ने के कारण मवेशियों के दूध देने की मात्रा में भी कमी आई है। यही वजह है कि उत्पादकता में कमी के कारण उन्हें मजबूरन कीमतों में इजाफा करना पड़ा है।
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मौसम की मार का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि दिन के समय तीखी धूप के कारण इन दिनों लोगों को घर से निकलने के लिए भी हिम्मत जुटानी पड़ रही है। दूसरी तरफ गर्मी के चलते दूध की आपूर्ति में कमी दर्ज की गई है। ऐसे में विक्रेताओं ने इस कमी को देखते हुए दूध के दाम तो बढ़ा दिया है। वहीं कुछ उत्पादकों द्वारा दूध की क्वालिटी भी गिरा दी गई है।
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शहरी क्षेत्र के घरों व मिठाई की दुकानों के अलावा होटलों और ढाबों पर प्रयोग होने वाला दूध ग्रामीण क्षेत्रों से ही आता है। दूसरी ओर गुज्जर समुदाय के लोग भी गर्मियों में अपने मवेशियों के साथ वापस पहाड़ों में चले जाते हैं। दूसरी ओर गर्मी के कारण दुधारू मवेशियों में दूध देने की मात्रा में भी गिरावट होती है।
माना जा रहा है कि दूध की आपूर्ति में कमी के कारण दूध में मिलावट की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। मिलावटखोर सिंथेटिक दूध के जरिए मौके का फायदा उठा सकते हैं।