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सैनिक वोकेशनल इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया
Pathankot
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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गुरदासपुर। प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री सेवा सिंह सेखवां ने स्थानीय सैनिक सुरक्षा सेवाएं विभाग के कार्यालय में पांच लाख रुपये की लागत से बनाए गए कैप्टन अरन सिंह जसरोटिया सैनिक वोकेशनल इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। इस मौके पर उनके साथ पंजाब जंगलात कार्पोरेशन के उप चेयरमैन राजिंदर बिट्टा और सैनिक सुरक्षा सेवाएं विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीएस बाजवा भी मौजूद थे। इस उपरांत सेखवां ने सैनिकों की विधवाओं और पूर्व सैनिकों को विभिन्न भलाई स्कीमों के तहत लगभग 5.50 लाख रुपये के चेक भी बांटे।
इस मौके पर कर्नल पीएस बाजवा (सेवा मुक्त) ने कहा कि जिला सैनिक सुरक्षा सेवाएं कार्यालय में नए शुरू किए गए वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में सैनिकों और आर्थिक तौर पर पिछडे़ अनुसूचित जाति और पिछड़ी श्रेणी के 100 विद्यार्थियों को एक बैच में अलग-अलग वोकेशनल डिग्री तथा डिप्लोमा कोर्सों के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।
इस मौके पर सेखवां ने कहा कि शहीदों की शहादतों का मूल्य कभी भी चुकाया नहीं जा सकता। वही राष्ट्र बुलंदियों को छूते हैं जो अपने शहीदों के दिखाए मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में देश भक्ति का जज्बा बना रहे इसके लिए शहीदों और उनके परिवारों को उचित मान सम्मान देना चाहिए। सेखवां ने कहा कि कारगिल के युद्ध से पहले देश की सरहदों की रक्षा करते शहादत प्राप्त करने वाले महान सैनिकों का कोई उचित मान सम्मान नहीं होता था और न ही उनके आश्रितों को सरकार की तरफ से कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती थी। कारगिल के शहीदों को मान सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शहीदों के परिवारों को उनके आर्थिक गुजारे के लिए शहरों में प्लाट और योग्यता अनुसार पहले, दूसरे और तीसरे दर्ज की नौकरियां देनी शुरू की। मुख्यमंत्री बादल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा नीत राजग गठबंधन वाली केंद्र सरकार से अपील कर शहीदों के परिवारों को गैस एजेंसियां और पेट्रोल पंप तथा अन्य आर्थिक लाभ देने का फैसला लिया था। इसी तरह शहीदों की मृतक देह को उनके वारिसों तक लाने के लिए और राष्ट्रीय सम्मान के साथ संस्कार करने का फैसला भी भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने किया था।
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सेखवां ने कहा कि पिछली प्रदेश सरकार में वह सुरक्षा सेवाएं विभाग के कैबिनेट में मंत्री थे। उस वक्त उन्होंने उक्त इंस्टीट्यूट के निर्माण और सैनिक रेस्ट हाउस की रेनोवेशन के लिए 10 लाख रुपये की ग्रांट दी थी। आज उस ग्रांट का सही उपयोग देख उन्हें खुशी हो रही है। इस मौके पर जनरल सचिव कंवर रविंदर सिंह विक्की, एनपी सिंह, हरजीत सिंह टिक्का, कमल ज्योति तथा डाक्टर जगबीर सिंह धर्मजोत भी मौजूद थे।
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इस मौके पर कर्नल पीएस बाजवा (सेवा मुक्त) ने कहा कि जिला सैनिक सुरक्षा सेवाएं कार्यालय में नए शुरू किए गए वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में सैनिकों और आर्थिक तौर पर पिछडे़ अनुसूचित जाति और पिछड़ी श्रेणी के 100 विद्यार्थियों को एक बैच में अलग-अलग वोकेशनल डिग्री तथा डिप्लोमा कोर्सों के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।
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इस मौके पर सेखवां ने कहा कि शहीदों की शहादतों का मूल्य कभी भी चुकाया नहीं जा सकता। वही राष्ट्र बुलंदियों को छूते हैं जो अपने शहीदों के दिखाए मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में देश भक्ति का जज्बा बना रहे इसके लिए शहीदों और उनके परिवारों को उचित मान सम्मान देना चाहिए। सेखवां ने कहा कि कारगिल के युद्ध से पहले देश की सरहदों की रक्षा करते शहादत प्राप्त करने वाले महान सैनिकों का कोई उचित मान सम्मान नहीं होता था और न ही उनके आश्रितों को सरकार की तरफ से कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती थी। कारगिल के शहीदों को मान सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शहीदों के परिवारों को उनके आर्थिक गुजारे के लिए शहरों में प्लाट और योग्यता अनुसार पहले, दूसरे और तीसरे दर्ज की नौकरियां देनी शुरू की। मुख्यमंत्री बादल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा नीत राजग गठबंधन वाली केंद्र सरकार से अपील कर शहीदों के परिवारों को गैस एजेंसियां और पेट्रोल पंप तथा अन्य आर्थिक लाभ देने का फैसला लिया था। इसी तरह शहीदों की मृतक देह को उनके वारिसों तक लाने के लिए और राष्ट्रीय सम्मान के साथ संस्कार करने का फैसला भी भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने किया था।
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सेखवां ने कहा कि पिछली प्रदेश सरकार में वह सुरक्षा सेवाएं विभाग के कैबिनेट में मंत्री थे। उस वक्त उन्होंने उक्त इंस्टीट्यूट के निर्माण और सैनिक रेस्ट हाउस की रेनोवेशन के लिए 10 लाख रुपये की ग्रांट दी थी। आज उस ग्रांट का सही उपयोग देख उन्हें खुशी हो रही है। इस मौके पर जनरल सचिव कंवर रविंदर सिंह विक्की, एनपी सिंह, हरजीत सिंह टिक्का, कमल ज्योति तथा डाक्टर जगबीर सिंह धर्मजोत भी मौजूद थे।