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फिरोजपुर में बहू चली सास की चाल
ब्यूरो/ अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Wed, 26 Mar 2014 10:32 PM IST
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कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी सास इंदिरा गांधी की नीति को अपनाते हुए टिकटें बांटी हैं।
1980 में इंदिरा गांधी ने कई ऐसे नेताओं को चुनावी अखाड़े में उतारा था जो चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। 80 में फिरोजपुर से बलराम जाखड़ को मैदान में उतारा गया था, जबकि उनका नाम प्रत्याशियों वाली सूची में ही नहीं था। इस बार सोनिया गांधी ने फिरोजपुर से सुनील जाखड़, अमृतसर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और आनंदपुर साहिब से अंबिका सोनी के नाम पैनल में न होते हुए भी उन्हें टिकट दिया है।
फिरोजपुर से कांग्रेसी प्रत्याशी सुनील जाखड़ का कहना है कि फिरोजपुर से छह उम्मीदवारों के नाम सूची में थे लेकिन उनका नाम नहीं था। पहले नंबर पर गुरुहरसहाए के राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी का नाम था। आखिर में हाईकमान ने उन्हें चुनाव लड़ने का आदेश दिया, जो उन्हें स्वीकार करना पड़ा।
पार्टी के आदेश के आगे किसी की नहीं चलती है। एक सवाल के जवाब में जाखड़ ने कहा कि फिरोजपुर में उनकी किसी से नाराजगी नहीं है। जिन्हें टिकट नहीं मिला है उन्हें भी अपने साथ लेकर चलेंगे। जाखड़ ने कहा कि प्रत्याशियों की सूची में कैप्टन अमरिंदर सिंह और अंबिका सोनी का नाम भी नहीं था फिर भी हाईकमान ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है।
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सियासी जानकारों का कहना है कि 1980 में जब इंदिरा गांधी ने बलराम जाखड़ को फिरोजपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा था उस समय भी पंजाब में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही थे और अब सुनील जाखड़ को चुनाव मैदान में उतारा है तब भी बादल ही मुख्यमंत्री हैं। सोनिया ने फिरोजपुर से अकालियों के गढ़ को खत्म करने के लिए ये नीति अपनाई है। बता दें कि 1980 में बलराम जाखड़ चुनाव जीत गए थे।
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1980 में इंदिरा गांधी ने कई ऐसे नेताओं को चुनावी अखाड़े में उतारा था जो चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। 80 में फिरोजपुर से बलराम जाखड़ को मैदान में उतारा गया था, जबकि उनका नाम प्रत्याशियों वाली सूची में ही नहीं था। इस बार सोनिया गांधी ने फिरोजपुर से सुनील जाखड़, अमृतसर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और आनंदपुर साहिब से अंबिका सोनी के नाम पैनल में न होते हुए भी उन्हें टिकट दिया है।
फिरोजपुर से कांग्रेसी प्रत्याशी सुनील जाखड़ का कहना है कि फिरोजपुर से छह उम्मीदवारों के नाम सूची में थे लेकिन उनका नाम नहीं था। पहले नंबर पर गुरुहरसहाए के राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी का नाम था। आखिर में हाईकमान ने उन्हें चुनाव लड़ने का आदेश दिया, जो उन्हें स्वीकार करना पड़ा।
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पार्टी के आदेश के आगे किसी की नहीं चलती है। एक सवाल के जवाब में जाखड़ ने कहा कि फिरोजपुर में उनकी किसी से नाराजगी नहीं है। जिन्हें टिकट नहीं मिला है उन्हें भी अपने साथ लेकर चलेंगे। जाखड़ ने कहा कि प्रत्याशियों की सूची में कैप्टन अमरिंदर सिंह और अंबिका सोनी का नाम भी नहीं था फिर भी हाईकमान ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है।
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सियासी जानकारों का कहना है कि 1980 में जब इंदिरा गांधी ने बलराम जाखड़ को फिरोजपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा था उस समय भी पंजाब में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही थे और अब सुनील जाखड़ को चुनाव मैदान में उतारा है तब भी बादल ही मुख्यमंत्री हैं। सोनिया ने फिरोजपुर से अकालियों के गढ़ को खत्म करने के लिए ये नीति अपनाई है। बता दें कि 1980 में बलराम जाखड़ चुनाव जीत गए थे।