{"_id":"97-41588","slug":"Firozpur-41588-97","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनडीए की सरकार बनने से पंजाब को फायदा: बादल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनडीए की सरकार बनने से पंजाब को फायदा: बादल
Firozpur
Updated Sun, 22 Sep 2013 05:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संगरूर। प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि यदि भाजपा नेता नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार केंद्रीय सत्ता में आती है तो उससे पंजाब के सर्वपक्षीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। वे यहां धूरी में ब्रह्म ज्ञानी भाई लालो जी के जन्म दिन के उपलक्ष्य में करवाए गए राज्य स्तरीय समागम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा पार्टी पंजाब के लिए हमदर्दी भरा दिल रखती है। यदि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो हमारे राज्य को विकास फंडों की कोई कमी नहीं रहेगी। केंद्र की सहायता से किए जाने वाले कार्यों में कोई भी बाधा नहीं रहेगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे सूबे के सर्वपक्षीय विकास के लिए आगामी लोक सभा चुनाव में अकाली भाजपा गठबंधन को राज्य की सभी तेरह सीटों पर जिताएं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार ने देश को तबाही की कगार पर ला खड़ा कर दिया है।
उन्होंने भाई लालो जी का जन्म दिवस हर साल सरकारी स्तर पर मनाने का ऐलान करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने अपनी महान विरासत को संभालने और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए अनेकों यादगारों का निर्माण करवाया है। क्योंकि पंजाब ने एक छोटा राज्य होने के बावजूद देश के आजादी संग्राम में अस्सी फीसदी योगदान डाला है। अब हमारी सरकार 18 अक्तूबर को अमृतसर में भगवान वाल्मीकि जी की यादगार का नींव पत्थर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान का फसली चक्कर अब किसानों के लिए लाभदायक नहीं रहा क्योंकि किसानों को इन फसलों का वाजिब भाव नहीं मिल रहा। कड़ी मेहनत के बावजूद पंजाब की किसानी 32 हजार करोड़ के कर्ज तले दबी हुई है। किसानों को गेहूं और धान की फसली चक्कर में से निकालने के लिए राज्य ने खेती विविधता पर जोर दिया है। इसके बावजूद खेतीबाड़ी और फसलों का समर्थन मूल्य निर्धारित करने और कीटनाशक, खाद आदि की कीमतें तय करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले केंद्र की ओर से लिए जाते हैं। इन्हीं कारणों के चलते राज्य की किसानी संकट से गुजर रही है।
बादल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के सिर चढ़े बोझ उतारने के लिए ट्यूबवेलों के बिल खुद भर रही है। इसके लिए सरकारी खजाने में से बिजली बोर्ड को छह हजार करोड़ दिए जा रहे हैं। यह सारा बोझ सरकार खुद झेल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से लगाए जा रहे थर्मल प्लांटों के कारण अगले साल तक बिजली की कमी भी पूरी हो जाएगी। उन्होेंने केंद्र पर हमेशा ही पंजाब को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब ही एक ऐसा राज्य है जहां कोई परिवार भूखा नहीं सोता। राज्य सरकार ने शगुन स्कीम का घेरा बढ़ाकर इसमें अनुसूचित जातियों और पछड़ी श्रेणियों के अलावा सभी गरीब परिवारों को शामिल कर लिया है।
विज्ञापन
इससे पहले शिअद के महासचिव और राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने संबोधित करते कहा कि पंजाब सरकार ने उन शहीदों की यादगारें बनाई, जिनको पूरे देश ने भुला दिया था। करतारपुरा नजदीक एक ऐसी यादगार बनाई जा रही है, जिसमें सभी शहीदों और लहरों की भूमिका को दर्शाया जाएगा। इस अवसर पर वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा, हलका इंचार्ज गोबिंद सिंह लौंगोवाल, पूर्व मंत्री हीरा सिंह गाबड़िया, भाजपा नेता विकास जैन, एसजीपीसी सदस्य भूपिंदर सिंह भलवान, नछतर सिंह जहांगीर, जत्थेदार रघबीर सिंह जखेपल, मुख्य संसदीय सचिव प्रकाश चंद गर्ग, बेगम फरजाना आलम, विशेष प्रमुख सचिव मुख्य मंत्री केजेएस चीमा, पंजाब वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इजहार आलम, पूर्व मंत्री नुसरत इकराम खां बग्गे, पंजाब मंडी बोर्ड के उप चेयरमैन रविंदर सिंह चीमा, डीसी कुमार राहुल, डीआईजी शिव कुमार वर्मा, एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू आदि हाजिर थे।
विज्ञापन
उन्होंने भाई लालो जी का जन्म दिवस हर साल सरकारी स्तर पर मनाने का ऐलान करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने अपनी महान विरासत को संभालने और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए अनेकों यादगारों का निर्माण करवाया है। क्योंकि पंजाब ने एक छोटा राज्य होने के बावजूद देश के आजादी संग्राम में अस्सी फीसदी योगदान डाला है। अब हमारी सरकार 18 अक्तूबर को अमृतसर में भगवान वाल्मीकि जी की यादगार का नींव पत्थर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान का फसली चक्कर अब किसानों के लिए लाभदायक नहीं रहा क्योंकि किसानों को इन फसलों का वाजिब भाव नहीं मिल रहा। कड़ी मेहनत के बावजूद पंजाब की किसानी 32 हजार करोड़ के कर्ज तले दबी हुई है। किसानों को गेहूं और धान की फसली चक्कर में से निकालने के लिए राज्य ने खेती विविधता पर जोर दिया है। इसके बावजूद खेतीबाड़ी और फसलों का समर्थन मूल्य निर्धारित करने और कीटनाशक, खाद आदि की कीमतें तय करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले केंद्र की ओर से लिए जाते हैं। इन्हीं कारणों के चलते राज्य की किसानी संकट से गुजर रही है।
विज्ञापन
बादल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के सिर चढ़े बोझ उतारने के लिए ट्यूबवेलों के बिल खुद भर रही है। इसके लिए सरकारी खजाने में से बिजली बोर्ड को छह हजार करोड़ दिए जा रहे हैं। यह सारा बोझ सरकार खुद झेल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से लगाए जा रहे थर्मल प्लांटों के कारण अगले साल तक बिजली की कमी भी पूरी हो जाएगी। उन्होेंने केंद्र पर हमेशा ही पंजाब को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब ही एक ऐसा राज्य है जहां कोई परिवार भूखा नहीं सोता। राज्य सरकार ने शगुन स्कीम का घेरा बढ़ाकर इसमें अनुसूचित जातियों और पछड़ी श्रेणियों के अलावा सभी गरीब परिवारों को शामिल कर लिया है।
विज्ञापन
इससे पहले शिअद के महासचिव और राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने संबोधित करते कहा कि पंजाब सरकार ने उन शहीदों की यादगारें बनाई, जिनको पूरे देश ने भुला दिया था। करतारपुरा नजदीक एक ऐसी यादगार बनाई जा रही है, जिसमें सभी शहीदों और लहरों की भूमिका को दर्शाया जाएगा। इस अवसर पर वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा, हलका इंचार्ज गोबिंद सिंह लौंगोवाल, पूर्व मंत्री हीरा सिंह गाबड़िया, भाजपा नेता विकास जैन, एसजीपीसी सदस्य भूपिंदर सिंह भलवान, नछतर सिंह जहांगीर, जत्थेदार रघबीर सिंह जखेपल, मुख्य संसदीय सचिव प्रकाश चंद गर्ग, बेगम फरजाना आलम, विशेष प्रमुख सचिव मुख्य मंत्री केजेएस चीमा, पंजाब वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इजहार आलम, पूर्व मंत्री नुसरत इकराम खां बग्गे, पंजाब मंडी बोर्ड के उप चेयरमैन रविंदर सिंह चीमा, डीसी कुमार राहुल, डीआईजी शिव कुमार वर्मा, एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू आदि हाजिर थे।