जम्मू-कश्मीर में जारी हिंसा और फिर कश्मीर में आतंकवादी हमले में 18 जवान के शहीद होने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान का मुद्दा उठा दिया। इसके बाद बलूचिस्तान में हो रहे प्रदर्शन पर मानवाधिकार संगठन के लोग भी आगे आ गए हैं।
बलूचिस्तान को पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत माना जाता है। आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना वहां के लोगों का शोषण कर रही है।
बलूच नेताओं ने कई बार आरोप लगाया है कि पाकिस्तान सरकार उनके मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है।
यहां पाकिस्तानी सेना शाति बनाए रखने के नाम पर लोगों के अपहरण और हत्या करने में संलग्न है। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर कई पाबंदिया हैं। साथ ही साथ रिपोर्टरों पर भी जुल्म किए जाते हैं।
पाकिस्तान की सरकार और सेना पर बलूचिस्तान के लोगों को प्रताड़ित करने और उन्हें वाजिब हक भी नहीं देने का आरोप लगता रहा है।
हाल ही में कई बलोच अलगाववादियों ने माफी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए हथियार छोड़ दिए हैं।