पाकिस्तान के सिंध प्रांत के समीप आजाद नगर में हिंदू समुदाय से संबंधित
बंधुआ मजदूरों की ऐसी बस्ती है भी जो बदत्तर हालत में जीने को
मजबूर है। इस बस्ती में रहने वाले ज्यादात्तर लोग
हिंदू हैं।
पाकिस्तान का आजाद नगर, जहां मौत के कुंए में है हिंदू समुदाय
11 एकड़ में फैले इन मजदूरों के घर मिट्टी के बने हुए हैं। इन बंधुआ मजदूरों को कृषि, ईंट भट्टों, खनन और मतस्य पालन करते देखा जा सकता है। जमीदारों द्वारा मजदूरों को गुलाम बनाकर रखा जाता है और घंटों काम करवाया जाता है।
पाकिस्तान का आजाद नगर, जहां मौत के कुंए में है हिंदू समुदाय
यहीं नहीं मजदूरों को मालिकों द्वारा कैद में रखा जाता है और डराया भी जाता है।बंधुआ मजदूर लिबरेशन फ्रंट की सैयदा गुलाम फातिमा बताती हैं कि वह यहां मौजूद मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं।
पाकिस्तान का आजाद नगर, जहां मौत के कुंए में है हिंदू समुदाय
वह बताती हैं कि 'यह रह रहे लोगों की हालात को मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। इन्होंने संसद की बिल्डिंग को ईंटों से बनाया लेकिन संसद ने इनकी मदद के लिए कोई कानून नहीं बनाया। इन्होंने अस्पताल भी बनवाया लेकिन इनके इलाज की कोई सुविधा नहीं।'
पाकिस्तान का आजाद नगर, जहां मौत के कुंए में है हिंदू समुदाय
वहीं इस समुदाय से निकली एक महिला ऐसी भी है जिसके हौसलों के चलते जमींदारों के चंगुल में फंसे हजारों मजदूर आज आजाद हैं। वीरो नाम की यह महिला चाहती हैं कि इस क्षेत्र में फंसे सभी मजदूर आजाद हो जाए। वह आजाद नगर में जाना-पहचाना नाम है। वह आजाद नगर के लोगों को किसी गुलाम और रखैल बनने का विरोध करती हैं और कमा कर खाने के लिए कहती हैं।