परमाणु हथियारों की रोक लगाने के लिए अमेरिका और रूस के बीच एकमात्र संधि हुई है, जिसका नाम है न्यू स्टार्ट संधि। दोनों देशों के बीच हुई ये संधि साल 2021 में समाप्त होने वाली है लेकिन अमेरिका ने इसका विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर रूस ने अपनी सहमति दे दी है। इस संधि का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों की होड़ में रोक लगाना था।
न्यू स्टार्ट संधि का होगा विस्तार, अमेरिका-रूस के बीच परमाणु हथियार की होड़ पर रोक
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रूस की संसद के दोनों सदनों ने पांच साल के लिए न्यू स्टार्ट संधि के विस्तार के लिए मंजूरी दे दी है। हालांकि विस्तार के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं है। दोनों देशों की ओर से संधि का विस्तार करने से दुनिया में परमाणु हथियारों को सीमित रखने के द्विदलीय प्रयास से अन्य देश भी प्रभावित होंगे।
बता दें कि इससे पहले रूस ने साल 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स ट्रीटी को निलंबित करके और अमेरिका ओपन स्काई संधि में शामिल करके सकारात्मक संदेश दिए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस संधि से दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई खट्टास कुछ कम होगी। पिछले कुछ सालों में ईरान और मध्य एशिया में पैदा हुई स्थितियों और चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने की दिशा में इस एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह संधि साल 1991 में की गई स्टार्ट-1 संधि का विस्तार है। इस संधि पर हस्ताक्षर करने का एक और उद्देश्य यह भी था कि दुनिया को परमाणु युद्ध के डर से मुक्ति दिलाई जा सके। इससे दोनों देशों ने खुद को 1,600 सामरिक वितरण वाहनों और छह हजार युद्धक हथियारों तक सीमित किया। इसके बाद साल 2002 में स्ट्रैटेजिक रिडक्शन की संधि हुई। इसके तहत अमेरिका ने हथियारों की संख्या को कम कर 1,700 की तो रूस ने आयुधों को 2,200 कर दिया। साल 2009 में स्टार्ट-1 संधि खत्म हुई, इसके बाद एक नई संधि और हुई, जिसका नाम न्यू स्टार्ट संधि रखा गया।
इस नई संधि के आधार पर अमेरिका और रूस दोनों देश रणनीतिक लॉन्चर्स और 1,550 युद्धक हथियारों की सीमित रखने पर सहमत हुए। इसके लिए रूस के सांसदों को इसकी पुष्टि करनी होगी और अध्यक्ष को संबोधित विधेयक को कानूनी रूप देने के लिए हस्ताक्षर करने होंगे। हालांकि ये औपचारिकता ही होगी क्योंकि रूस के दोनों सदन सैद्धांतिक तौर पर इस मंजूरी दे चुके हैं।