महिलाओं के रहने के लिए सबसे बदतर माने जाने वाले अफगानिस्तान में उनके प्रति बदलाव तेजी से आ रहा है। पहले महिलाओं को गाड़ी चलाना, फिर सिनेमा देखने की इजाजत के बाद वह फैशन शो में भी आने-जाने लगी हैं।
काबुल से 450 किलोमीटर दूर मजार-ए-शरीफ पर अफगान कल्चरल फैशन शो का आयोजन किया गया। युवतियां यहां पारंपरिक वेशभूषा में रैंप पर आईं, लेकिन खास यह था कि पुरुषों और महिलाएं एक साथ इस इवेंट में शामिल थे।
चौंकाने वाली बात है कि मजार-ए-शरीफ एक रिमोट एरिया है और यहां किसी भी फैशन शो में महिलाओं का आना संभव नहीं था। यह एक सामाजिक बदलाव ही है, क्योंकि आतंकवाद और पुरुषवादी समाज के दबाव के चलते यहां महिलाओं को सालों से ऊपर उठने नहीं दिया जा रहा था।
फैशन शो का आयोजन क्रल्चर ग्रुप हकीकी की ओर से किया गया, जिसके हेड अजमल हकीकी ने बताया कि इससे पहले भी काबुल में फैशन शो का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की तस्वीर युद्ध, दंगे, तालिबान, सुसाइड अटैक और धमाकों से जोड़ कर देखी जाती है। हम शो से साबित करना चाहते हैं कि हमारा 5000 साल पुराना इतिहास है।
बता दें कि महिलाओं की अफगानिस्तान में स्थिति देखी जाए तो उनके लिए वह दुनिया का दूसरा खतरनाक और असुरक्षित देश है। महिलाओं को पढ़ने नहीं दिया जाता। आकंड़ों को देखा जाए तो 87 फीसदी महिलाएं अनपढ़ हैं।
यहां 70 से 80 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी शादी 19 साल की उम्र में कर दी जाती है। इतना ही नहीं उन्हें अक्सर घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है।