माना जा रहा था कि नए साल के लिए दुनिया को एक सेकंड का अतिरिक्त इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन नासा ने इस बड़ी समस्या को खत्म कर दिया है। सूर्य की निगरानी कर रही सोलर डायनामिक ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) के साथ नासा मिशन ने नए साल की मध्य रात्रि से ठीक एक सेकंड पहले दुनिया भर की घड़ियों में लीप सेकंड (अतिरिक्त समय) को जोड़ दिया है। इससे घड़ियों में एक सेकंड का अंतर खत्म हो गया है।
नासा ने घड़ियों में यह अतिरिक्त सेकंड धरती के घूमने की गति के साथ समय का संतुलन बनाए रखने के लिए किया है, ताकि धीरे धीरे समय का अंतर खत्म किया जा सके। अमेरिका में नासा के गॉडर्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर स्थित एसडीओ के प्रोजेक्ट वैज्ञानिक डीन पेस्नेल ने बताया कि हमारी धरती 3 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चल रही है, इसलिए इसके हर पहलू पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि हमें धरती के घूमने की गति के साथ समय-समय पर वक्त (घड़ी) का सही संतुलन बनाना पड़ता है ताकि इन दोनों के बीच किसी प्रकार की टकराहट नहीं हो। इसलिए वर्ष 2016 में इस लीप सेकंड को हम जोड़ रहे हैं।
औसतन पृथ्वी को इस साल 2 मिलीसेकंड के हिसाब से घूमना था जो 1.5 मिलीसेकंड के हिसाब से ही घूम पाई। इस कारण 31 दिसंबर 2016 को 60 सेकंड वाला मिनट 61 सेकंड का हो जाता। धरती के धीमी गति से घूमने का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय समय का हिसाब रखने वाली घड़ियों पर पड़ता, और ये घड़ियां धरती की गति से कुछ पीछे रह जातीं। इसलिए नासा को इस बदलाव का फैसला लेना पड़ा।
इंटरनेशलन अर्थ रोटेशन एंड रिफ्रेंस सिस्टम सर्विस यानी आईईआरएस द्वारा दोनों स्तर पर समय का अंतर परखा जाता है। इसी के तहत लीप सेकंड पर नजर रखी जाती है।
वर्ष 1972 में अंतरराष्ट्रीय एटॉमिक टाइम व यूटीसी की व्यवस्था बनाई गई। तब से लगभग 26 अतिरिक्त लीप सेकंड छह माह से सात साल के अंतर के साथ जुड़ चुके हैं। हाल ही में लीप सेकंड 30 जून 2015 को हुआ था।