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India-Nepal Border: भारत-नेपाल सीमा पर कैसे बना जालसाजी का नेटवर्क? 500 यात्रा दस्तावेज गायब होने से खुला राज
Sat, 22 Aug 2026 07:56 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 22 Aug 2026 07:56 AM IST
सार
Nepal Fake Citizenship Scam: नेपाल विदेश मंत्रालय से 2009 में गायब हुए 500 खाली यात्रा दस्तावेजों की जांच दोबारा शुरू होने के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े एक कथित जालसाजी सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। जांच में विदेशी नागरिकों के लिए जाली नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र बनाकर उनके आधार पर पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज हासिल कराने की बात सामने आई है। इनमें अफगान और तिब्बती शरणार्थियों के नाम सामने आए हैं। आखिर ये सारे दस्तावेज अब तक कहां हैं?
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क्या जाली नेपाली नागरिकता से विदेशी भारत में दाखिल हुए?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल में 15 साल पहले विदेश मंत्रालय के स्टोर से गायब हुए 500 खाली यात्रा दस्तावेजों की दोबारा जांच ने भारत और नेपाल से जुड़े दस्तावेज जालसाजी के एक कथित नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच में आशंका जताई गई है कि इस नेटवर्क के जरिए विदेशी नागरिकों और शरणार्थियों के लिए जाली नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर नेपाली पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज हासिल किए जाते थे। भारत-नेपाल की खुली सीमा और दोनों देशों के बीच वीजा-मुक्त आवाजाही को देखते हुए इस मामले का सुरक्षा पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।
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500 दस्तावेज गायब होने का मामला फिर क्यों खुला?
नेपाल विदेश मंत्रालय से वर्ष 2009 में ए-026001 से ए-026500 श्रृंखला के 500 खाली यात्रा दस्तावेज गायब हुए थे। इनमें से अब तक केवल तीन दस्तावेज बरामद किए जा सके हैं। बाकी 497 दस्तावेजों का कोई पता नहीं चला है। मामले की दोबारा जांच नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीआईबी को सौंपी गई है। जांच के दौरान मंत्रालय के पूर्व अधिकारी बचराम केसी को गिरफ्तार किया गया है। उनके बयान को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वरिष्ठ राजनयिकों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। इतने वर्षों बाद दोबारा शुरू हुई जांच का मुख्य सवाल यही है कि इतने संवेदनशील दस्तावेज आखिर किसके हाथ लगे और उनका इस्तेमाल कहां किया गया।
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जाली नागरिकता से असली पासपोर्ट तक कैसे पहुंचते थे?
- जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार कथित सिंडिकेट भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों में सक्रिय था। नेटवर्क के सदस्य विदेशी नागरिकों या अवैध रूप से रह रहे लोगों के लिए जाली नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र तैयार करवाते थे। इसके बाद इसी पहचान के आधार पर नेपाली पासपोर्ट और दूसरे यात्रा दस्तावेज हासिल करने का रास्ता तैयार किया जाता था।
- इस पूरी प्रक्रिया में दोनों देशों में मौजूद दलालों के समन्वित नेटवर्क की बात सामने आई है। गिरफ्तार पूर्व अधिकारी केसी के बयान के मुताबिक भारत और नेपाल में दलालों का एक संगठित तंत्र काम कर रहा था। हालांकि, इस नेटवर्क से जुड़े सभी आरोपों और इसकी पूरी संरचना की जांच अभी जारी है।
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