उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में रविवार को पहले नंबर पर रहा। आसमान में उड़ते धूल के कणों की वजह से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 358 पहुंच गया। रैपिड रेल के निर्माण कार्य और गेहूं की थ्रेसिंग की वजह से आसमान में प्रदूषण की एक परत सी बन गई, जिससे लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हुई। वहीं गर्म हवाओं के थपेड़ों ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है।
तस्वीरें: देश भर में सबसे ज्यादा प्रदूषित मेरठ, 358 पहुंचा एक्यूआई, गर्मी से लोगों का हाल-बेहाल, लू के थपेड़ों ने झुलसाया
मेरठ में दिन का तापमान 40.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। वहीं अप्रैल के 10 दिनों में रविवार का दिन सीजन में दूसरी बार सबसे गर्म रहा। मौसम कार्यालय पर न्यूनतम तापमान भी 20.1 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया। यह शनिवार के मुकाबले तीन डिग्री ज्यादा है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक भी बेहद खराब श्रेणी में है।
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भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष का कहना है कि अभी लू के असर के चलते दिन का तापमान 40 और 41 डिग्री के आसपास ही बना रहेगा। 12 से 14 अप्रैल के बीच थोड़ी राहत मिल सकती है।
बागपत दूसरे और गाजियाबाद तीसरे नंबर परी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा रविवार को जारी 125 शहरों के बुलेटिन में देश के सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ के बाद बागपत दूसरे नंबर पर और तीसरे नंबर पर गाजियाबाद रहा। प्रदूषण के साथ गर्मी और लू के कारण लोगों का बाहर निकलना तक दूभर हो रहा है।
रेड जोन में मेरठ
एक्यूआई का स्तर 300 से ऊपर पहुंचना खतरनाक है। रविवार को मेरठ का एक्यूआई 358 रहा जो बेहद खराब (रेड जोन) की श्रेणी में है। एनसीआर में मेरठ गाजियाबाद बागपत और मुजफ्फरनगर रेड जोन में रहे। लगातार यही स्थिति रहने पर खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह बेहद खतरनाक है।