हरियाणा की 23 साल की खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जीतने के बाद नम आंखों के साथ कहा, 'मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना था। मैंने एशियाई स्तर पर तीन-चार रजत पदक जीते हैं। इसलिए इस बार मैं स्वर्ण जीतने का दृढ़ निश्चय बनाकर आई थी। मेरे शरीर ने भी मेरा साथ दिया। मैंने कड़ा प्रशिक्षण लिया था और ईश्वर ने भी मुझ पर कृपा दिखाई। आज सब कुछ मेरे अनुकूल रहा।'
उन्होंने कहा, 'चोटें एक खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती हैं। यह भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूप से मुश्किल होता है, लेकिन तमाम चीजों को पीछे छोड़ते हुए हाल में कुछ अच्छे पदक जीते। किसी ने कहा है कि एक खिलाड़ी चोट के बाद मजबूत होकर उभरता है और मुझे लगता है कि सच में मैं पहले से ज्यादा मजबूत हुई हूं।'
किस्मत का ही खेल था कि विनेश ने एशियाई खेलों में अपने पहले मैच में उसी चीनी खिलाड़ी यनान सुन को हराया, जिसके खिलाफ मुकाबले में वह रियो में चोटिल हुई थीं। विनेश ने कहा कि उन्हें हमेशा लगता रहा कि वह सुन से ज्यादा मजबूत खिलाड़ी हैं और यह बात साबित करने का आज दिन था।
विनेश ने कहा, 'दबाव था लेकिन यह साबित करने का कि मैं असल में उससे ज्यादा मजबूत हूं। मैं आज यह साबित कर देना चाहती थी क्योंकि मैं पूर्व में उससे तीन बार हार चुकी हूं। और आज मैंने यह कर दिखाया।' विनेश को भारत के मानसिक रूप से सबसे मजबूत पहलवानों में से एक माना जाता है और उन्होंने कहा कि यह नैसर्गिक है।
5 of 7
इंटरनेशनल पहलवान विनेश फोगट
- फोटो : अमर उजाला
इस साल की शुरूआत में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाली खिलाड़ी ने कहा, 'मैं इस पर काम करती हूं लेकिन मैं बचपन से ही ऐसी हूं। मैं हमेशा से मजबूत रही हूं। मैं जीवन में जोखिम उठाती हूं और उसका फायदा मिलता है। मैं खुद में भरोसा करती हूं। मैं वहां लगा कि ऐसा कुछ नहीं है जो मैं नहीं कर सकती हूं।'